तारीख पे तारीख: आखिर कब मिलेगा आम आदमी को न्याय?
न्याय में देरी, अन्याय के समान है। ‘तारीख पे तारीख’ अब केवल फिल्मी संवाद नहीं, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था की कड़वी हकीकत बन चुका है। न्याय की उम्मीद लेकर अदालत पहुंचने वाला आम आदमी वर्षों तक मुकदमे की सुनवाई का इंतजार करता रहता है। कई बार न्याय की प्रतीक्षा करते-करते उसकी जिंदगी ही समाप्त हो … Read more