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“अतृणे पतितो वह्निः स्वयमेवोपशाम्यति” — आनंद शास्त्री

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सम्माननीय मित्रों ! हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री श्रीमान हेमन्तो बिस्वशर्मा जी,श्री महंत आदित्य नाथ योगी जी,श्रीमान पुष्कर सिंह धामी जी जैसे महापुरुषों ने अपने राज्यों में वर्ग विशेष की गुण्डागर्दी के विरुद्ध चलायी कार्यवाही के अंतर्गत ! हलद्वानी जैसी हिंसा के विरुद्ध बुलडोजर से उनकी सम्पत्ति के साथ-साथ उनके हौसले भक कुचल दिये ! हजारों अवांछित अतिक्रमण कर बनी कुछ मन्दिरों, मस्जिदों,कब्रों और जेहाद सीखाने वाले अपंजीकृत मदरसों को ढहा दिया ! अतिक्रमण कारी गुण्डों के घर ढहा कर वहाँ पुलिस स्टेशन बना दिये ! विगत सोमवार को पल्लाकोट निवासी एक बच्ची को छेडने के आरोपी रिजवान के घर को 48 घण्टों में बुलडोजर से ढहा दिया ! हरियाणा सरकार ने नूंह में जेहादियो के पथराव के बाद मेवात नामक स्थान पर 770 इमारतों को ध्वस्त कर दिया गया !  खरगोन में रामनवमी की शोभायात्रा पर पथराव करने वाली भीड़ के पूरे मुहल्ले के घरों और दुकानों को ढहा दिया गया ! मध्यप्रदेश में 14 दिसम्बर को नवगठित सरकार के मुख्यमंत्री श्रीमान मोहन यादव जी ने भोपाल जैसे नगर में मुस्लिम उपद्रवियों की भीड़ के घरों को 36 घण्टों में बुलडोजर से कुचल डाला !
और तो और उन गुण्डों द्वारा की गयी सरकारी एवं सार्वजनिक सम्पत्ति के नुकसान की भरपाई भी उनसे ही करना सुनिश्चित किया यह एक ऐसा प्रशंसनीय कार्य है जिसकी प्रशंसा भारतीय जनता जितनी भी करे वो कम है।
आज मैं हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री जी की दृष्टि अभी बराक उपत्यका के चायबागानों एवं सुदूर ग्रामीण अंचलों में प्रशासन की आँखों में धूल झोंक कर बांग्ला भाषी जेहादी घुसपैठियों द्वारा किये गये अतिक्रमण  की डलवाना चाहता हूँ।
ये लोग पहले किसी मरे हुवे मुर्दे की लाश चायबागान की भूमि  अथवा ग्रामीण अंचल के आसपास सरकारी जमीन पर दफनाते हैं ! तदोपरान्त धीरे-धीरे काफी दूर तक बांस के बेडे बनाकर कब्रिस्तान बना लेते हैं ! किसी कब्र को किसी भी मनमर्जी के नाम से दरवेश की मजार कहकर आसपास मस्जिद और फिर बस्ती की बस्ती बस जाती है ! आसपास के हिन्दुओं को सताने लगते हैं ! हमारी बहू बेटियों को सताते हैं ! प्रशासनिक सहयोग न मिलने से वे अपनी जमीन इनको औने पौने दाम में बेचने को मजबूर हो जाते हैं ! और इसका विरोध करने वाले लोगों के विरुद्ध ही तथाकथित मानवाधिकारवादी इनके ही दलाल उसके विरुद्ध एफ आइ आर कराकर अभियुक्त बनाने की सफल साजिश रचते हैं।
मित्रों ! बराक उपत्यका में ! यहाँ के सुदूर वनवासी क्षेत्रों में, ग्रामीण अंचलों में,नगरीय क्षेत्रों में,और सर्वाधिक  चायबागानों में ! बांग्ला देशी लुटेरों द्वारा बिलकुल पश्चिम बंगाल की तरह घुसपैठ कर-बांग्ला भाषी” होने का लाभ लेकर विगत राजनैतिक दलों के सहयोग से अपने नकली आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र,पेन कार्ड और राशन कार्ड तक बनवा लिये ! मैं समझता हूँ कि बराक उपत्यका में दर्जनों ऐसे स्थान बन चुके जहाँ चायबागान श्रमिकों हेतु-“संदेश खाली” का निर्माण बंगाल कर रहे हैं ! इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिये कि पर्दे के पीछे ऐसे संदेश खाली बन चुके हों।
मित्रों ! मुझे अपने मुख्यमंत्री जी पर पूरा विश्वास है कि वो चायबागानों से लेकर लगभग सभी ऐसे स्थानों पर जहाँ शान्ति दूत बंगाल बसते जा रहे हैं ! उनका सर्वे कराने के पश्चात उनके पहचान पत्रों का गंभीरता पूर्वक सत्यापन करा कर चिन्हित अतिक्रमण कारियों की पूरी चल-अचल सम्पत्ति का अधिग्रहण कर उनके आवासों पर बुलडोजर चलवाकर यह मिसाल रखें कि कोई भी असम की धरती का उपयोग ! असम की बहू बेटी का शोषण ! असम की धरती पर करने की कोशिश करेगा तो उसे उसके परिवार के साथ नष्ट कर दिया जायेगा
मित्रों ! मेरी आदरणीय मुख्यमंत्री जी एवं असम मंत्रिमण्डल से भी प्रार्थना एवं अपेक्षा है कि जिस प्रकार आप यू सी सी विधेयक यहाँ पारित करने के मार्ग पर चल रहे हैं यह अत्यंत ही आवश्यक कदम है ! इसे पारित करने की निडरता किसी में नहीं थी ! आपके इस प्रयास का समूचा भारत समर्थन करेगा ! हमें आकण्ठ विश्वास है कि यहाँ भी आपका ध्यान इस ओर अवस्य  होगा कि-“एक देश एक संविधान” की भावना का सम्मान करते हुवे बराक उपत्यका में-“हिन्दी भाषी,बांग्ला भाषी एवं अन्य भाषायी”लोगों को शिक्षा क्षेत्र में अपनी भाषा को भी उतना ही सम्मान एवं अधिकार मिले जितना अन्य को मिलता है ! इसमें आज होता भारी भेदभाव सामान्य जनता के मध्य मानसिक, शैक्षणिक,आर्थिक,राजनैतिक एवं सामाजिक खाई को और भी गहरी तथा जहरीली करती जा रही है।
आज जिस प्रकार समान नागरिक संहिता पारित होने के पूर्व ही समूचे असम में शांति दूत अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं ! उससे इतना तो सिद्ध होता ही है कि असम के लिये-“यूडीएफ” आने वाले कल नेशनल कान्फ्रेंस से सैकड़ों गुना अधिक खतरनाक सिद्ध होगी ! विशेषकर बराक उपत्यका के चायबागानों में हिन्दुओं के प्रति बढती इनकी आक्रामकता एवं
-“भूमि जेहाद” खतरे की सभी सीमाओं को लांघने के पश्चात अब इनकी कुदृष्टि ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों पर भी बढती जा रही है ! और हमारे बांग्ला भाषी हिन्दू भाईयों को अभी भी-“बंगाल” का आतंक सचेत नहीं कर पाया ! आज बराक उपत्यका पुनश्च हिन्दी और बांग्ला भाषी समुदाय के मध्य धीरे-धीरे भडकायी जा रही ! राष्ट्र हित के नाम पर पुनश्च एक समुदाय को नष्ट करने की जो कोशिश हो रही है इससे कुछ लोगों की आलीशान कोठियां भले ही बन जायें किन्तु इसके दूरगामी परिणाम हमारी पीढियों को भुगतने होंगै ! उपनिषद कहते हैं कि-“अतृणे पतितो वह्निः स्वयमेवोपशाम्यति” यदि तृण नहीं होंगे ! अर्थात ईंधन नहीं होगा ! मतभेद का कारण नहीं होगा ! भेदभाव नहीं होगा तो वैराग्नि अपने-आप शान्त हो जायेगी !
क्रमशः …..आनंद शास्त्री सिलचर, सचल दूरभाष यंत्र सम्पर्कांक-
 6901375971″

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