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अली-ऐ-लिगांग: मिसिंग जनजाति का कृषि त्योहार गोलाघाट में मनाया मनाया गया।

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अभिषेक सिंघा गोलाघाट 14 फरवरी: मिसिंग जनजाति का कृषि त्योहार अली-ऐ-लिगांग बुधवार को गोलाघाट जिले के कई स्थानों पर पारंपरिक उत्साह और धूमधाम से मनाया गया। यह त्यौहार हर साल असमिया महीने फागुना के पहले बुधवार को मनाया जाता है।अली-ऐ-लिगांग एक प्रकृति आधारित त्योहार है जो खेती के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है। अली- ऐ- लिगांग नाम तीन शब्दों से मिलकर बना है ‘अली’ का अर्थ है जड़, ‘ऐ’ का अर्थ है फल और ‘लिगांग’ का अर्थ है बुआई। यह त्यौहार ‘आहु’ धान की खेती की शुरुआत में मनाया जाता है।
यह त्योहार बोकाखाट, डेरगांव, मेरापानी, सरूपथार और गोलाघाट जिले के कई अन्य मिसिंग जनजाति क्षेत्रों में मनाया गया। उम्र की परवाह किए बिना समारोह स्थल पर सभी ने भाग लिया और मोरोंग-ओकुम और हरियाली के बीच मेरापानी आंचल के बिजॉयपुर गाँव के सामुदायिक मैदान में ओई:नितॉम, अनु:नितोम गाया और पारंपरिक ‘गुमराग सो: मैन’ नृत्य किया। महिलाओं ने हस्तनिर्मित और बुने हुए एगे, रिबी गैसेंग, गेरो,आदि कपड़े पहने देखा गया जो उनकी संस्कृति को दर्शाते हैं, जबकि पुरुषों को गोनरो उगोन, टोंगाली और मिबू गालुक पहने देखा गया। इससे पहले, स्थानीय ग्रामीणों और आमंत्रित अतिथि ऑल एंड संड्री एनजीओ के संस्थापक अभिषेक सिंघा ने मिसिंग कला और संस्कृति के अग्रदूत ओइराम बोरी को पुष्पांजलि अर्पित की। कमल कांता पेगु, जयंती पेगु और जीतू तायुंग ने आहू धान के बीज बोने का समारोह में भाग लिया जबकि आयोजन समिति के अध्यक्ष कमलेश्वर डोले और सचिव दिलीप कुमार पेगु ने अली-ऐ-लिगांग उत्सव की पौराणिक कथा बताई। बिजॉयपुर गांव के स्थानीय समूहों द्वारा प्रस्तुत ‘मेगा नृत्य’, मिसिंग पारंपरिक पोशाक और शिल्प की प्रदर्शनी बिजॉयपुर गांवों के अली-ऐ-लिगांग उत्सव के कुछ विशेष आकर्षण थे।

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