आचार्य श्री तुलसी का 25 वां महाप्रयाण दिवस का आयोजन

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आचार्य श्री तुलसी का 25 वां महाप्रयाण दिवस का आयोजन
साध्वीश्री संगीतश्री जी के सान्निध्य शिलचर में गुरुदेव श्री तुलसी का 25 वा महाप्रयाण दिवस कोविड प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वीश्री संगीतश्री के नमस्कार महामन्त्र के मंगल उच्चारण के साथ प्रारंभ हुवा।मंगलाचरण की प्रस्तुति श्रीमती सुशीला देवी दुग्गड़ द्वारा की गई। सभा उपाध्यक्ष प्रदीप सुराणा, महिला मंडल अध्यक्षा श्रीमती प्रेम सुराणा, तेयुप अध्यक्ष पंकज नाहर, देवचंद जी बैद व श्रीमती अमिता बरड़िया आदि विभिन्न वक्ताओं ने गुरुदेव श्रीतुलसी के अवदानों का उल्लेख करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किया।तेरापंथ महिला मंडल की बहनें, रामलाल जी बैद व पप्पू द्वारा मधुर गीतिका प्रस्तुत कर गुरुदेव श्रीतुलसी को याद किया गया।
साध्वीश्री  मुदिताश्री जी, साध्वीश्री शांति प्रभा जी व साध्वीश्री कमल विभा जी ने अपने जीवन के संस्मरण सुनाते हुए उस विराट व्यक्तित्व को श्रद्धा सुमन अर्पित किया। तीनों साध्वियों ने बहुत ही मधुर गीतिका का संगान किया। साध्वीश्री संगीतश्री जी ने आज के दिवस पर श्रावक-श्राविकाओं को ज्यादा से ज्यादा तप, त्याग, जप व सामायिक की प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आचार्य श्री तुलसी ने न केवल भारत में अपितु विश्व में जैन धर्म की कीर्ति फेलाई है। सह-देह तो वह हमारे सामने उपस्थित नहीं है परन्तु ऐसा अहसास होता है कि जैसे इर्दगिर्द हमारे पास ही है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए सभा मंत्री तोलाराम गुलगुलिया ने आचार्य श्री तुलसी के अनेक अवदानों में से कुछ अवदानों को स्मरण करते हुए उस महान संत को भावभीनी श्रद्धांजलि समर्पित की। अणुव्रत आंदोलन, आगम सम्पादन, नया मोड़, प्रेक्षा ध्यान, जीवन विज्ञान, समण श्रेणी, आचार्य पद का विसर्जन आदि आपके ऐसे अनेक अवदान थे, जिसे दुनिया हमेशा याद रखेगी, शताब्दियों के बाद ऐसे विरले व्यक्तित्व धरती पर जन्म लेते हैं। अंत में साध्वीश्री जी द्वारा ॐ तुलसी ॐ तुलसी ॐ तुलसी ॐ,जय तुलसी जय तुलसी जय तुलसी जय के सामुहिक जप के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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