आरएसएस प्रमुख ने हिंदू संस्कृति के संरक्षण के लिए संकल्प दिलाया

चित्रकूट में महाकुंभ में जुटे हजारों संत और लाखों हिन्दू संघ प्रमुख ने किया हिदुओं में एकता का आह्वान

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नई दिल्ली ब्यूरो, December 16, 2021

चित्रकूट – हिंदुओं के एकता से ही विश्व मे मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा। चित्रकूट में बुधबार आयोजित हिन्दू एकता महाकुंभ के विशाल मंच ने अनेक महत्वपूर्ण संदेश विश्व को दिया है। तीन दिवसीय ‘हिंदू एकता महाकुंभ’ में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने हिंदू संस्कृति के संरक्षण और हिंदू धर्म से गए लोगों की घरवापसी के लिए संकल्प दिलाया।

मोहन भागवत ने हिंदू एकता महाकुंभ को संबोधित करते हुए कहा कि कलयुग में एकता की शक्ति है, इसलिए हमें अहंकार, स्वार्थ छोड़कर काम करना पड़ेगा।

इसी मंच में मोहन भागवत ने समाजसेबी संजय राय शेरपुरिया की पुस्तक ‘हिन्दू धर्म की धरोहर, भारतीय संस्कृति’ का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि यह शीर्षक स्वयं में इस पुस्तक का समग्र परिचय करा रहा है। सनातन हिन्दू धर्म क्या है और किस प्रकार से यह भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि के रूप में निरंतर क्रियाशील है, यही तथ्य इस पुस्तक के आधार तत्व हैं।

यज्ञ, हवन, शंख, पद्म, गाय, त्रिशूल, मंदिर, देवस्थान जैसे शब्द सनातन हिन्दू वैदिक संस्कृति में ही हैं। ये केवल शब्द ही नहीं हैं बल्कि इन शब्दों के उच्चारण में ही ऐसा ध्वनित होता है कि जीवन और जीवन का रहस्य क्या है। हमारे देवी, देवता और धार्मिक प्रतीक क्या हैं। कैसे हैं। कितने महत्वपूर्ण हैं। क्यो हैं। स्वाभाविक है कि जिस प्रकार से समाज बदल रहा है और विश्व पटल पर अनेकानेक उपासना पद्धतियां जन्म ले रही हैं, ऐसे परिवेश में किसी को भी यदि हिन्दू संस्कृति को जानना और समझना है तो संजय राय शेरपुरिया की इस पुस्तक को अवश्य पढ़ना चाहिए।

जिस सलीके से इस पुस्तक में सनातन प्रतीकों को माला की मोती के रूप में प्रस्तुत किया गया है, वह अद्भुत है। भारतीयता, संस्कृति और हिन्दू विरासत को समझने के लिए इस पुस्तक में सभी प्रमुख तथ्य, तत्व और प्रतीक उपस्थित हैं। यह पुस्तक एपूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन के संयोजक तुलसी पीठ के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास और संरक्षक धर्मचक्रवर्ती तुलसीपीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य थे। आज इस विराट मंच से हिंदुत्व के मामले में विश्व को अनेक संदेश दिए गए।

तुलसी पीठाधीश्वर, पद्मविभूषण, जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के संरक्षण में आयोजित इस महाकुंभ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत इस कार्यक्रम के मुख्यातिथि थे। इस आयोजन में श्री श्री रविशंकर, साध्वी ऋतंभरा, स्वामी चिदानंद मुनि, रमेश भाई ओझा, रामविलास दास वेदांती सहित भारत के लगभग सभी सनातन वैदिक हिदू परंपरा के संत और मनीषी हिस्सा ले रहे थे।

यह आयोजन ऐसे समय मे हो रहा है जब देश और विश्व मे हिन्दू संस्कृति के विरूद्ध विभिन्न प्रकार के षड्यंत्र किये जा रहे हैं। कश्मीर में धारा 370 की समाप्ति, अयोध्या जी मे भव्य श्रीराममंदिर के निर्माण, काशी में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण, मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण जनस्थली के उद्धार के साथ अनेक उल्लेखनीय कार्य आगे बढ़ चुके हैं। हिंदुओ की एकता को तोड़ने के लिए जाति, सम्प्रदाय और पंथों के विभाजक षड्यंत्र किये जा रहे हैं। ऐसे समय मे यह आयोजन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। विश्व को हिंदुत्व के विराट स्वरूप से परिचित कराने का यह प्रयास है।

इस आयोजन में यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि समग्र हिंदुत्व के सभी प्रतिनिधि इसमे शामिल होकर एक मंच से हिन्दू एकता का संदेश देकर सामाजिक एकता को मजबूती प्रदान करें। इस आयोजन में संतो के अलावा देश के सामाजिक सांस्कृतिक क्षेत्र के व्यापक प्रतिनिधित्व की भी कोशिश हुई।

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