कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं पुरातन अध्ययन विश्वविद्यालय,नलबाड़ी में द्विदिवसीय अखिल भारतीय वैदिक संगोष्ठी सुसंपन्न

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कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं पुरातन अध्ययन विश्वविद्यालय,नलबाड़ी में द्विदिवसीय अखिल भारतीय वैदिक संगोष्ठी सुसंपन्न

कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं पुरातन अध्ययन विश्वविद्यालय,नलबाड़ी में द्विदिवसीय अखिल भारतीय वैदिक संगोष्ठी सुसंपन्न हुई। विश्वविद्यालय के संस्कृत वेद- अध्ययन विभाग तथा महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान ,उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी का उद्घाटन दिनांक 23 मार्च को विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रोफेसर दीपक कुमार शर्मा ने किया उद्घाटन भाषण में कुलपति ने संगोष्ठी के मुख्य विषय “पूर्वोत्तरभारते वैदिकपरंपरा” इस विषय पर प्रकाश डालते हुए सातवीं सदी के कामरूप राज्य के महान राजा कुमार भास्कर वर्मा तथा उनके परवर्ती राजाओं के काल में वैदिक परंपरा के विकास तथा उसके महत्व का विशद वर्णन कर उसकी प्रासंगिकता को द्योतित किया।

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,जम्मू परिसर, के वेद विभागाध्यक्ष प्रो मनोज कुमार मिश्र ने अपने वक्तव्य में वेद की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए वेदों के भारतीय सभ्यता का मूलाधार सिधांतित किया एवं पूर्वोत्तर भारत में वैदिक परंपरा के विस्तार का प्रतिपादन करते हुए कहा कि वेद आधारित सभी भारतीय विद्याएं चारों पुरुषार्थों को सिद्ध करते हुए मानव मात्र के परम कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं।उद्घाटन सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो रमेश चंद्र भारद्वाज ने भी वेदों के महत्व तथा प्रासंगिकता पर बल देते हुए ओजस्वी भाषण दिया।तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के के संस्कृत संकाय अध्यक्ष प्रो संतोष शुक्ल ने भी वेदों के आलोक में गंभीर वक्तव्य रखा। सभी अतिथियों का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी के मुख्य संयोजक संस्कृत वेद अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ प्रणवज्योति डेका ने किया तथा कार्यक्रम का संचालन सहसंयोजक श्री पवन कुमार पांडेय ने किया ।

उद्घाटन सत्र के पश्चात दो शैक्षणिक सत्रों का आयोजन किया गया जिसमें देश के विभिन्न प्रांतों से आए हुए वैदिक विद्वानों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। प्रथम सत्र की अध्यक्षता गुवाहाटी विश्वविद्यालय के प्रो कामेश्वर शुक्ल तथा द्वितीय सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर मनोज कुमार मिश्र ने की।सायं 4:00 बजे से विभागीय छात्रों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जिन्हें देखकर अतिथियों ने प्रसन्न होकर छात्रों की भूरी भूरी प्रशंसा की।दिनांक 24 मार्च को तृतीय शैक्षणिक सत्र की अध्यक्षता प्रो संतोष शुक्ल ने की तथा अध्यक्षीय उद्बोधन में वैदुष्यपूर्ण वक्तव्य रखा।चतुर्थ सत्र की अध्यक्षता गोहाटी विश्वविद्यालय की पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्षा प्रो नलिनी देवी मिश्र ने की तथा अपने अध्यक्षीय उद्बोधन से सब को तुष्ट किया।

संगोष्ठी के समापन सत्र में माननीय कुलपति प्रो दीपक कुमार शर्मा कुलसचिव डॉ हेमेंद्र शर्मा परीक्षा नियंत्रक डॉ सुशांत कुमार कश्यप मुख्य अतिथि प्रोफेसर रमेश भारद्वाज और अन्य अतिथियों ने विभागीय छात्रों द्वारा हस्तलिखित विभागीय पत्रिका “आम्नायार्णवः” का लोकार्पण किया तथा इस श्रमसाध्य कार्य हेतु उनकी सराहना की।मुख्य अतिथि ने अपने वक्तव्य में भारत की सांस्कृतिक एकता को केंद्र बिंदु बनाते हुए कहा कि संपूर्ण भारत में वैदिक परंपरा एक ही है तथा सब को एक सूत्र में बांधने का कार्य करती है। विभिन्न शैक्षणिक सत्रों का संचालन व संयोजन संगोष्ठी की सह संयोजिका डॉ बर्णाली बरठाकुर तथा डा. सानू सिन्हा ने किया। समापन सत्र का संचालन डॉ राजीव लोचन शर्मा ने किया। संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के समस्त विभागों के अध्यापक तथा छात्र उपस्थित रहे।

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