कोरोना सम्भल जा  -सुनील कुमार कानु

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कोरोना सम्भल जा  -सुनील कुमार कानु
लाखो घर उजाड़कर तुझे लाज न आइ
बच्चों से – माता पिता, परिवार से सन्तान छीन तुझे शर्म न आइ
कौन है तु तेरी पहचान क्या, चायना की माइ या किसीकी भौजाई
बच्चों की पढ़ाई-लिखाई छिन तुझे रोना नही आई
बिजार, रास्ताघाट, श्मसान कर तेरी मौत न आइ
कौन है तु तेरी पहचान क्या, चायना की माइ या किसीकी भौजाई
तूझे त फक्र है की तु है चायना की माइ ओर किसीकी भौजाइ
मेरे लिए तो तु है मानव जाति की सबसे बड़ी दुःखदाइ
कौन है तु तेरी पहचान क्या, चायना की माइ या किसीकी भौजाई
कौन है तु जरा सामने आ, देखकर जरा मेरा हौसला जा
छठी कि दुध याद कराया है मैने, क्यों नही बताइ तुझे प्लेग – टीवी तेरी मौसियाउत भाइ
कौन है तु तेरी पहचान क्या, चायना की माइ या किसीकी भौजाई
सुना हु तुझसे तेरी औलाद – देवर सब ने नाते तोड़ी है
मेरा देख अपने परिवार के लिए हमने सब दर्द झेला है
कौन है तु तेरी पहचान क्या, चायना की माइ या किसीकी भौजाइ
मास्क लगाइ त नाक दुखाइ, सेनिटाइजर लगाइ त हात बसाइ
फिर भी हम नही घबड़ाई, खुब जल्दी होगी तेरी विदाई
कौन है तु तेरी पहचान क्या, चायना की माइ या किसीकी भौजाई?

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