गो विज्ञान परीक्षा गुवाहाटी एवं तिनसुकिया विभाग की बैठक सम्पन्न

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गो विज्ञान परीक्षा गुवाहाटी एवं तिनसुकिया विभाग की बैठक सम्पन्न
*भाग्य बदलती है गौ माता, गौ पूजन से मिलेगी पापों से मुक्ति…*
*पुण्य फल की प्राप्ति के लिए प्रतिदिन करें गौ-दर्शन*
*भारतीय गो विज्ञान परीक्षा से देशी गाय के बारे में जाने महत्वपूर्ण जानकारी.. गो विज्ञान परीक्षा हेतु शीघ्र पंजीयन करें 1 सितम्बर 2021 ऑनलाइन परीक्षा में सहभागी बने.
विहिप गोरक्षा केन्द्रीय मंत्री एवं पालक नार्थईस्ट क्षेत्र उमेश चन्द्र पोरवाल जी ने एवं प्रान्त गो विज्ञान परीक्षा प्रमुख अंकुर बेजबरुआ जी ने भारतीय गो विज्ञान परीक्षा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए.. 20 अगस्त तक अधिक से अधिक पंजीयन कराने का अनुरोध किया। गुवाहाटी क्षेत्र में एक लाख गो विज्ञान परीक्षा कराने का लक्ष्य रखा गया है तिनसुकिया विभाग गो विज्ञान परीक्षा प्रमुख नमित चौधरी जी व पं. भवानी शंकर शास्त्री जी, गुवाहाटी गो विज्ञान परीक्षा प्रमुख हरे कृष्णा पाठक जी, ध्रुव ज्योति ठाकुरिया जी आदि कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया है। अंकुर बेजबरुआ जी ने बताया अनेक संस्थाओं जैसे विद्याभारती, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, एकल अभियान, इस्कॉन, भारत सेवाश्रम संघ आदि के प्रमुख बन्धुओं से मिलकर गो विज्ञान परीक्षा ऐप्स डाउनलोड करने का अनुरोध किया है।
गौमाता की महिमा अपरंपार है। मनुष्य अगर जीवन में गौमाता को स्थान देने का संकल्प कर ले तो वह संकट से बच सकता है। मनुष्य को चाहिए कि वह गाय को मंदिरों और घरों में स्थान दे, क्योंकि गौमाता मोक्ष दिलाती है।
   पुराणों में भी इसका उल्लेख मिलता है कि गाय की पूंछ छूने मात्र से मुक्ति का मार्ग खुल जाता है।
गाय की महिमा को शब्दों में नहीं बांधा जा सकता।
   मनुष्य अगर गौमाता को महत्व देना सीख ले तो गौमाता उनके दुख दूर कर देती है।
गाय हमारे जीवन से जु़ड़ी है। उसके दूध से लेकर मूत्र तक का उपयोग किया जा रहा है। गौमूत्र से बनने वाली दवाएं बीमारियों को दूर करने के लिए रामबाण मानी जाती हैं।
गोपाष्टमी के दिन गाय का पूजन करके उनका संरक्षण करने से मनुष्य को पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
  जिस घर में गौपालन किया जाता है, उस घर के लोग संस्कारी और सुखी होते हैं। इसके अलावा जीवन-मरण से मोक्ष भी गौमाता ही दिलाती है।
   मरने से पहले गाय की पूंछ छूते हैं ताकि जीवन में किए गए पापों से मुक्ति मिले।
लोग पूजा-पाठ करके धन पाने की इच्छा रखते हैं लेकिन भाग्य बदलने वाली तो गौ-माता है। उसके दूध से जीवन मिलता है। रोज पंचगव्य का सेवन करने वाले पर तो जहर का भी असर नहीं होता और वह सभी व्याधियों से मुक्त रहता है। गाय के दूध में वे सारे तत्व मौजूद हैं, जो जीवन के लिए जरूरी हैं। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि गाय के दूध में सारे पौष्टिक तत्व मौजूद होते हैं। मीरा जहर पीकर जीवित बच गई, क्योंकि वे पंचगव्य का सेवन करती थीं। लेकिन कृष्ण को पाने के लिए आज लोगों में मीरा जैसी भावना ही नहीं बची।
रोज सुबह गौ-दर्शन हो जाए तो समझ लें कि दिन सुधर गया, क्योंकि गौ-दर्शन के बाद और किसी के दर्शन की आवश्यकता नहीं रह जाती। लोग अपने लिए आलीशान इमारतें बना रहे हैं यदि इतना धन कमाने वाले अपनी कमाई का एक हिस्सा भी गौ सेवा और उसकी रक्षा के लिए खर्च करें तो गौमाता उनकी रक्षा करेगी इसलिए गौ-दर्शन को सबसे सर्वोत्तम माना जाता है।
गाय और ब्राह्मण कभी साथ नहीं छोड़ते हैं लेकिन आज के लोगों ने दोनों का ही साथ छोड़ दिया है।
जब पांडव वन जा रहे थे तो उन्होंने भी गाय और ब्राह्मण का साथ मांगा था। समय के बदलते दौर में राम, कृष्ण और परशुराम आते रहे और उन्होंने भी गायों और संतों के उद्धार का काम किया। इसकी बड़ी महिमा सूरदास और तुलसीदास ने गौ कथा का वर्णन कर की है।
लोग दृश्य देवी की पूजा नहीं करते और अदृश्य देवता की तलाश में भटकते रहते हैं। उनको नहीं मालूम कि भविष्य में बड़ी समस्याओं का हल भी गाय से मिलने वाले उत्पादों से मिल सकता है। आने वाले दिनों में संकट के समय गौमाता ही लोगों की रक्षा करेगी। उपरोक्त जानकारी देते हुए विश्व हिंदू परिषद गौ रक्षा विभाग के राष्ट्रीय प्रमुख उमेश चंद पोरवाल ने कहा की गो सेवा ही गोपाल सेवा है।

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