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चुनावी राज्यों पर मेहरबान हुईं वित्त मंत्री, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल के लिए खोला खजाना

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नई दिल्ली। सरकार ने आम बजट में जहां अपना पूरा फोकस कोविड काल में ट्रैक से उतरी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने को लेकर रखा तो दूसरी ओर अपनी सियासत को सींचने के लिए भी कोई कसर नहीं छोड़ी। बजट में चार बड़े राज्यों के चुनाव की रंगत साफ तौर पर दिखी जिनके लिए वित्तमंत्री ने बड़ी दरियादिली दिखाते हुए खजाना खोल दिया। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल में बड़े-बड़े राजमार्गों के निर्माण के लिए 2.27 लाख करोड़ रुपये का भारी भरकम आवंटन करने की घोषणा की गई। इतना ही नहीं, बंगाल और असम के चाय बगान की कामकाजी महिलाओं को लुभाने के लिए भी 1000 करोड़ रुपये की कल्याणकारी योजना का भी एलान हुआ।

इन चुनावी राज्यों में भाजपा की सियासी पूंजी में इजाफे पर लक्ष्य साधते हुए वित्तमंत्री ने कोविड काल में राजस्व जुटाने की चुनौतियों के बावजूद तमिलनाडु के लिए तिजोरी खोलने में सबसे ज्यादा दरियादिली दिखाई। वित्त मंत्री ने तमिलनाडु को 1.03 लाख करोड़ रुपये राजमार्गों के निर्माण के लिए आवंटित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार के साथ ही सूबे में कई और आर्थिक कॉरिडोर बनाए जाएंगे। इसमें मदुरै-कोल्लम और चित्तूर-थटचूर कॉरिडोर का निर्माण अगले साल शुरू होगा। इसी तरह केरल में 1100 किलोमीटर लंबे राजमार्गों के निर्माण के लिए वित्त मंत्री ने 65000 करोड़ रुपये देने की घोषणा की जिसमें मुंबई-कन्याकुमारी कॉरिडोर के 600 किमी का केरल के हिस्से का राजमार्ग भी शामिल है।

वित्तमंत्री जब इन राज्यों से जुड़े एलान कर रही थीं, तब लोकसभा में विपक्षी बेंच की ओर से इसे चुनावी लॉलीपॉप भी कहा गया और तंज के तीर चलाए गए। तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी और केंद्रीय राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो के बीच आपसी कटाक्ष के दौर भी चले। इसी बीच वित्त मंत्री ने बंगाल में 675 किमी राजमार्गों के निर्माण और विस्तार के लिए 25000 करोड़ रुपये देन की घोषणा की। इसमें कोलकाता-सिलीगुड़ी राजमार्ग के विस्तार की योजना भी शामिल है। बंगाल के चुनाव पर लगी भाजपा की रणभेदी आंख पर लक्ष्य रखते हुए वित्तमंत्री ने इसी के साथ अगले तीन साल में 34000 करोड़ रुपये की लागत से सूबे के राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण-विस्तार की घोषणा भी कर डाली।

इसी तरह तमिलनाडु के मछुआरों पर दांव लगाने के लिए समुद्री घास की खेती के लिए तो असम व बंगाल के चाय बगान में कार्यरत महिला कामगारों के कल्याण के लिए 1000 करोड़ रुपये के आवंटन का एलान का किया। बजट में दिखे इस चुनावी रंग पर विपक्षी खेमे के कई सदस्यों ने अपने सूबों को इसमें शामिल नहीं करने को लेकर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा सरकार बजट में भी सियासत से बाज नहीं आती। वहीं तृणमूल कांग्रेस के एक सदस्य ने तंज कसते हुए कहा कि पुडुचेरी के लिए भी कुछ एलान होना चाहिए क्योंकि चुनाव तो वहां भी होने हैं।

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