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“दीर्घा वै जाग्रतो रात्रिः दीर्घ श्रान्तस्य योजनम् — आनंद शास्त्री

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सम्माननीय मित्रों ! अंतर्राष्ट्रीय असुरक्षित,सामरिक अत्याधुनिक एवं प्राचीन अस्त्रों के साथ-साथ शस्त्रों की अंधी दौड़,प्राकृतिक आपदाओं,अतिशय विकसित एवं अतिशय अविकसित राष्ट्रों के नाम पर छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटी तथाकथित मानव सभ्यता आज किंकर्तव्यविमूढ़ सी हुयी आत्मविश्लेषण करने को बाध्य हो चुकी ! और ऐसा होना ही था ! महाभारत से लेकर प्रथम एवं द्वितीय विश्वयुद्ध के पहले बिलकुल ऐसी ही परिस्थितियाँ अंतर्राष्ट्रीय परिद्रश्य में बनती रही हैं ! और हमारे पूर्वजों ने उसे बार-बार झेला है।
इराक,सीरिया,अफगानिस्तान,अजरबैजान,यूक्रेन और गाजी आततायी फिलीस्तीनियों के गुरिल्ला युद्ध में नयी नयी तकनीकी रूप से अत्यंत ही आसुरी युद्धक सामग्रियों ने आज विकसित देशों को आश्चर्यजनक रूप से इस्लाम के चाल और चरित्र का पुनर्आंकलन करने को बाध्य कर दिया है ! वहीं दूसरी ओर अत्याधुनिक युद्ध सामग्रियों के निर्माता और निर्यातकों के साथ-साथ इन्हीं सामग्रियों के आयातक देशों को भी ये बता दिया है कि-“परमाणु बमों” के जखीरे पर बैठे राष्ट्रों की कोई औकात नहीं है।
मित्रों ! किसी मनुष्य की हत्या चाकू,गोली,तोप से करने की अपेक्षा उसे आर्थिक रूप से कंगाल कर दो वो खुद ही एक आत्मघाती बम बन जायेगा ! ऐसा ही आज देखने-सुनने को मिल रहा है। और इसके पीछे-“तेल का खेल”और क्रिश्चियन अथवा मुस्लिम बनाने की ऐसी अंधी दौड़ थी और है भी कि- जिस दौड में दौडते -दौडते धीरे-धीरे कट्टर ईसाई और मुस्लिमों के कदम थकते जा रहे हैं ये दोनों ही अंथधार्मिक कट्टर धडों की धडकनें थमती जा रही हैं !  और इनमें बैठे शांतिप्रिय लोगों का इनसे मोहभंग होता जा रहा है।
यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि आज विश्व के सर्वाधिक अशांत पूर्व एवं पूर्वमध्येशिया के देशों अर्थात इजरायल,फिलिस्तीन, यूक्रेन,रूस,सऊदी अरब,इराक,ईरान,कतर,ओमान,मंगोलिया, अजरबैजान,ओर्मान,जाॅर्डन,सीरिया,जापान एवं लगभग समूचा यूरोप आज अपने-अपने अस्तित्व की लडाई लडने को बाध्य है,
वैसे भी मध्येशिया में 95% तातार और मंगोल रहते हैं अर्थात यह चंगेज़ खान की-“कुकर्म भूमि” है। ये तातार ऐसी दिशाहीन लड़ाकू दोधारी तलवारें चलाने वाली आदिवासी तद्स्थानीय जाति है जिसके पूर्वज उस ईसा और मूसा की सन्तान हैं जो अपनी तलवारों से सदियों से अपनों और परायों का गला काटने के कारण दुर्दान्त लुटेरों के नाम से विख्यात हैं।
मित्रों ! भगवान मनु ने कहा है कि-
“दीर्घा वै जाग्रतो रात्रिः दीर्घ श्रान्तस्य योजनम्।
दीर्घो बालानां संसारः सद्धर्मम् अविजानताम्॥”
दिन में सोने वाले और रात जागने वालों की प्रतीक्षा कभी समाप्त नहीं होती वे ऐसे व्यर्थ चलते-चलते थके हुए क्लांत लोग हैं जिनके लिये एक कोस चलना भी असंभव सा है जीवन व्यर्थ लगता है उनको अपना। आज ऐसी ही दिशाहीन गति सुन्नी मुस्लिमों की हो चुकी ! तातार अर्थात यहूदियों के शत्रु और तैमूर लंग के वंशज -“हनफी” अर्थात दारुल उलूम देवबन्दियों की सर्वत्र दुर्दशा होनी प्रारम्भ हो चुकी ! विश्व को इस्लामिक भाईचारे के नाम पर जेहादी विचारधारा बांटने वाले इनके अधिकांश मुल्लाओं के दोहरे व्यक्तित्व एवं मीठे जहर में बुझी जुबान और आसमानी किताब की सच्चाई सभी जान चुके ! आज समूचा विश्व इनके आतंक से त्रस्त होकर धीरे-धीरे इनकी उन इबादत गाहों को नष्ट करने को बाध्य हो चुका जिनके ऊपर नमाज और नीचे जिहाद के पर्चे छपते हैं! और हथियारों के जखीरे छुपाकर रखे हैं। ये सभी स्वीकार करते हैं कि ज्ञान एवं तकनीक में विजय का मंत्र होता है ! किन्तु हम उनकी लिखी कहानियों में फंस गये ! जब कि हमारी विजय अपनी लिखी कहानी में उनको फंसाने में है।
आज विश्व के विकसित देशों की भयावह स्थिति हो चुकी है !
इराक अमेरिका युद्धान्तर्गत समूची दुनिया के तथाकथित बुद्धिजीवी ये कहते थे कि ये युद्ध-“पेट्रोल” के लिये है ! ईरान पर प्रतिबंध पेट्रोल के लिये अमेरिका ने लगाया है ! अर्थात ये भी कहते थे कि-“संयुक्त अरब अमीरात,कतर और रूस” अपने पेट्राडाॅलर के कारण इतराते हैं ! किन्तु अब तो वैज्ञानिकोंने पेट्रोल का विकल्प हाइड्रोजन,बैट्री,इथेनाॅल ! यहाँ तक कि कानपुर के हमारे होनहार रसायन वैज्ञानिकों ने-“मक्के” से भी इथेनाॅल बनाने का गुण सूत्र खोज निकाला है ! वैसे भी प्राचीन वैदिकीय भारत में खांड,कलमी शोरा,गंधक और पवनचक्की से प्राप्त उर्जा का उपयोग होता रहा है ! प्राचीन ऐतिहासिक संस्कृति बताती है कि मिथिला,अयोध्या, लंका, मथुरा जैसे विकसित क्षेत्रों में इसी प्रकार की उर्जा से प्रकाश की व्यवस्था एवं पुष्पक जैसे विमानों का संचालन होता था ! और ऐसे रथ हुवा करते थे जो एक घंटे में दिल्ली से सिल्चर आ सकते थे ! अर्थात आज का भारत विश्व का सर्वाधिक समर्थ राष्ट्र बनने की दिशा में सफलता के नित्य नये नये मिथक स्थापित करता जा रहा है ! अमेरिका,यूरोप और पेट्रोल के कुओं में बैठे मेंढ़क धीरे-धीरे अंतर्कलह के कारण अपनी प्रासंगिकता खोते जा रहे हैं ! आज मैं गर्व कर सकता हूँ अपनी केन्द्रीय सरकार पर कि जब अमेरिका से लेकर यूरोप तक फिलीस्तीनियों के नाम पर वहां के शिक्षित जेहादी इजरायल का विरोध कर रहे थे ! जब सभी इस्लामिक देश इजरायल के विरुद्ध एकजुटता के नाम पर हमास का-“मौखिक” समर्थन कर रहे थे ! यहाँ तक कि जब खुद इजरायल में दो मुंहे सांप अर्थात अरब मूल के जेहादी इजरायल का विरोध कर रहे थे ! ऐसी समूचे विश्व में फिलिस्तीन के समर्थन के नाम पर इस्लाम खतरे में है का पैगाम देने वाले -“नापाक जेएनयू,इन्डिया,कम्यूनिस्ट और शिक्षित जेहादियों” को आवाज बुलन्द करने का बिलकुल मी अवसर नहीं मिला। अर्थात हमारी सरकार ने सांपों के फन कुचलने की विद्या भलीभांति सीख ली है…..आनंद शास्त्री सिलचर, सचल दूरभाष यंत्र सम्पर्कांक 6901375971″

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