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देश के लिए खतरा है अलगाव और नफ़रत के बीज! 

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हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में हाल ही में कुछ समय पहले अतिक्रमण हटाने को लेकर बवाल हो गया, जिसके बाद प्रशासन ने उपद्रवियों के पैर में गोली मारने के आदेश जारी किए। मीडिया के हवाले से आई खबरों से पता चला कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में नगर निगम ने गुरुवार 8 फरवरी को एक अवैध मदरसा ढहा दिया। नमाज पढ़ने के लिए बनाई गई एक इमारत पर भी बुलडोजर चला दिया। इसके बाद वहां हिंसा फैल गई।माहौल को देखते हुए हाल फिलहाल प्रशासन ने शहर में कर्फ्यू लगा दिया है।हिंसा का असर आसपास के इलाकों तथा नैनीताल में भी देखने को मिला। उत्तरप्रदेश के बरेली में भी हल्द्वानी घटना के बाद पथराव हुआ। इसमें चार लोग ज़ख़्मी हो गये।बताया जा रहा है कि उत्तराखंड के हल्द्वानी हिंसा में नगर निगम को पांच करोड़ जबकि पुलिस को एक करोड़ से ज्यादा के नुकसान की आशंका है। यह भी जानकारी मिलती है कि बनभूलपुरा हिंसा मामले में पुलिस ने अब तक पांच हजार अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से मस्जिदों के बाहर पुलिस फोर्स तैनात रही। हालांकि पुलिस व पैरामिलिट्री फोर्स आसपास के शहरों, हर क्षेत्र में नजर बनाए हुए है। उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को बनभूलपुरा की घटना का अपडेट दिया है। इधर नेताओं, मुख्यमंत्री ने हिंसा पर सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। यह कहा जा रहा है कि अवैध कब्जे कर माहौल खराब करने की मंशा रखने वालों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक नेता ने इस हिंसा की घटना पर यह बात कही है कि इस तरह के कब्जे राज्य की डेमोग्राफी बदलने की साजिश का हिस्सा हैं।जानकारी देना चाहूंगा कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में बवाल के बाद रामनगर में धारा 144 लागू कर दी गई है। बवाल के बाद स्कूल कॉलेज, दुकानें तक बंद रहीं। यहां तक कि इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गईं। रेलवे को काठगोदाम से यात्रियों के लिए काठगोदाम से लालकुआं तक प्राइवेट बस सेवाएं उपलब्ध करानी पड़ीं। एक नफ़रत का माहौल पैदा करने की कोशिशें उपद्रवियों द्वारा की गई। सच तो यह है कि हाल ही में पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के हल्द्वानी क्षेत्र में जो कुछ घटित हुआ है, वह बेहद ही चिन्ताजनक है। जानकारी के अनुसार वहां एक मदरसे तथा मजार को पुलिस की सहायता से तोड़ने आये नगर निगम के कर्मचारियों पर भड़की भीड़ ने अचानक हमला कर दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों में भीषण रक्तिम झड़पें हुईं। मीडिया के हवाले से जो खबरें आई ,उसके अनुसार भीड़ ने वाहनों सहित पुलिस चौकी पर भी हमला कर दिया बताते हैं। उपद्रवियों की ओर से भीषण पथराव किया गया। इस पत्थरबाज़ी में बहुत-से पुलिस कर्मचारी घायल हो गए। यह भी जानकारी मिलती है कि पुलिस की ओर से चलाई गई गोली में 6 व्यक्तियों की मौत हो गई तथा सैकड़ों घायल हो गए।पुलिस का इस संबंध में यह कहना है कि नगर निगम के कर्मचारियों ने वर्षों से चल रहे इस मदरसे को अदालत के फैसले के बाद तोड़ा है, जिससे एक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में रोष व हिंसा फैल गई। दरअसल, उपद्रवी हिंसा का सहारा लेकर क्षेत्र का वातावरण खराब करना चाहते थे और वहां तनाव पैदा करना चाहते थे, लेकिन अब प्रशासन व पुलिस व आमजन सतर्क हो गया है। हिंसा फैलाने वाले ज्यादातर लोगों को पुलिस द्वारा अब हिरासत में भी ले लिया गया। अधिकारियों ने यह भी कहा कि ऐसे दंगाइयों/उपद्रवियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून(एनएसए)की कड़ी से कड़ी(सख्त) धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों ने यहां तक भी धमकी दी है कि दंगाइयों को ऐसा सबक सिखाया जाएगा, जो उनकी आने वाली पीढ़ियां तक याद रखेंगी। यह हमारे देश के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। देश में हिंसा, नफ़रत का माहौल पैदा करने की कोशिशें की जा रही हैं। उत्तराखंड का हल्द्वानी ही नहीं विगत कुछ समय से उत्तर पूर्व के एक छोटे-से राज्य मणिपुर में जो घटनाक्रम घटित हो रहा है तथा जिस तरह से वहां दो अलग-अलग कबीलों से संबंधित लोगों में हिंसा भड़की हुई है, उसने इस राज्य का तो नुकसान किया ही है, परन्तु इससे देश भर में जो सन्देश पहुंचा है, वह भी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। किसी भी देश में शांति, आपसी सहयोग, प्रेम, सद्भावना का होना बहुत ही जरूरी है। यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि शांति, संयम, आपसी प्रेम , भाईचारा व सद्भाव किसी भी परिवार, समाज व देश के निर्माण में महत्वपूर्ण घटक होते हैं। सच तो यह है कि किसी भी देश में शांति व सद्भाव के बिना उस देश को सुचारु रूप से चलाया नहीं जा सकता है। इसलिए समाज में शांति व सद्भाव का होना काफी आवश्यक है, इसी से किसी भी देश का विकास व प्रगति संभव है। शांति और सद्भाव होने पर ही मनुष्य अपने आप को सुरक्षित महसूस करता है। जब देश में चारों ओर शांति, सद्भाव व आपसी सहयोग और भाईचारे का माहौल होता है, तभी वह देश अपनी प्रगति पर ध्यान दे सकता है। आज धर्म के नाम पर  जिस तरह का माहौल हमारे देश भर में बन रहा है, उससे कहीं न कहीं हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी अंगुली उठती है। आज हमारे समाज में न जाने क्यों नफ़रत, द्वेष,हिंसा व ईर्ष्या के भाव पैदा हो रहे हैं ? इसके लिए आखिर जिम्मेदार कौन है ? आज समाज में आपसी सद्भावना, प्रेम व अपनत्व की बजाए टकराव बढ़ा है, शांति की बजाए अशांति पैदा हुई है। अलगाव और नफ़रत आदमी को जीने नहीं देते। साम्प्रदायिकता की भावना ठीक नहीं होती है। यहां पाठकों को यह जानकारी देना चाहूंगा कि एक समुदाय या धर्म के लोगों द्वारा दूसरे समुदाय या धर्म के विरुद्ध किये गए शत्रुभाव को सांप्रदायकिता के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है। वास्तव में जब एक सम्प्रदाय के हित दूसरे सम्प्रदाय से टकराते हैं तो सम्प्रदायिकता की भावना का उदय होता है यह एक उग्र विचारधारा हैै जिसमे दूसरे सम्प्रदाय की आलोचना की जाती हैै इसमे एक सम्प्रदाय दूसरे सम्प्रदाय को अपने विकास में बाधक मान लेता है। भारत सभी धर्मों, पंथों, धर्म,जाति, मज़हब का सम्मान करने वाला देश रहा है। भारत की विश्व में एक अनूठी पहचान भी आपसी समन्वय, शांति व सहयोग के कारण रही है, लेकिन आज कुछ असामाजिक तत्व समाज में नफ़रत का जहर घोल रहे हैं। हमारे देश के संविधान को सबको समान व बराबर दर्जा दिया है। कोई छोटा,बड़ा नहीं है, सभी हरेक तरह से समान हैं। आज हमें जरूरत है तो अपने देश के संंविधान की भावनाओं को अपनाने की। मात्र कानून किसी भी देश में शांतिपूर्ण , अच्छे व एक सुरक्षित माहौल का सृजन नहीं कर सकता है। अंत में यही कहूंगा कि शांति और सद्भावना किसी भी राष्ट्र की मूलभूत आवश्यकता है। कहना ग़लत नहीं होगा कि सदियों सदियों से भारत विविधता में एकता का आनंद लेता है। देश में असामाजिक तत्वों को आज कड़े सबक सिखाने की जरूरत है। सदियों सदियों से हमारे देश में विभिन्न धर्मों, जातियों और पंथों के लोग एक साथ रहते आये हैं और रहेंगे । हमारा संविधान अपने सभी नागरिकों को समानता की स्वतंत्रता देता है। वास्तव में, सरकार के साथ-साथ देश के नागरिकों को देश में शांति और सद्भाव लाने के लिए मिलकर एकजुटता से काम करना चाहिए।
सुनील कुमार महला, फ्रीलांस राइटर, कालमिस्ट व युवा साहित्यकार, उत्तराखंड।

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