बच्चों के लिए आयुर्वेद का वरदान है ‘स्वर्ण प्राशन’, उन्हें बलवान और बुद्धिमान बनाने के लिए जरूर कराएं स्वर्ण प्राशन संस्कार।

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बच्चों के लिए आयुर्वेद का वरदान है 'स्वर्ण प्राशन', उन्हें बलवान और बुद्धिमान बनाने के लिए जरूर कराएं स्वर्ण प्राशन संस्कार।

स्वर्ण प्राशन की परंपरा दक्षिणी और उत्तरी भारत में बहुत ही प्रचलित है, वहां के अभिभावक अपने बच्चों को जन्म उपरांत 15 साल की उम्र तक स्वर्ण   प्राशन करवा रहे हैं।उत्तर पूर्वांचल में पहली बार इसका प्रचलन डॉ सोनम पांडेय ने किया। उन्होंने 2020 के जुलाई महीने में इसकी शुरुआत अपने पूत्र के लिए की, जो कि कोरोना काल में जन्मे थे। फिर अपने परिवार वर्ग में सभी बच्चों को करवाती रही, ताकि बच्चो को कोरोना के प्रकोप से बचाया जा सके।लोगों की मांग के चलते, डॉ सोनम ने अब पिछले दिसंबर महीने से सामूहिक तौर पर हर महीने पुष्य नक्षत्र के दिन स्वर्णप्राशन करवा रही हैं। बाद में डाबर के जैसी आयुर्वेद कंपनियों ने भी उनका साथ दिया और शिलचर में ही एक दो बार मुफ्त का स्वर्ण प्राशन कैंप भी किया।

डॉ सोनम इस औषधी को, जो कि स्वर्ण भस्म, गाय का घी और ब्राह्मी आदि जड़ी बूटियों से खुद तैयार करती हैं, यह एक लंबी और तकनीकी प्रक्रिया है। बाजार में स्वर्णप्राशन के नाम पर बहुत सारी प्रोडक्ट्स उपलब्ध होते जा रहे हैं, लेकिन इनमें स्वर्ण की मात्रा और तैयारी की पद्धतियों पर आशंका के चलते उन्होंने अपने और बाकी बच्चों के लिए इसे खुद बनाने की बीड़ा उठाया है। ताकि वे अपने और आपके बच्चो को कोरॉना आदि संक्रमण से बचा सकें, उन्हें भविष्य में बुद्घि और बलशाली बना सकें।
स्वर्ण प्राशन संस्कार बच्चों के लिए वरदान से कम नहीं हैं. इस लेख में जानिए स्वर्ण प्राशन संस्कार क्या है, स्वर्ण प्राशन संस्कार कितने साल के बच्चों का किया जाता है और स्वर्ण प्राशन संस्कार के लाभ क्या हैं.
  घर में जब बच्चे का जन्म होता है तो माता-पिता की खुशी का ठिकाना नही रह जाता है। इस ख़ुशी के मौके पर पूरा परिवार और यहां तक कि रिश्तेदार खुशियां मानते है । ऐसे में माता पिता बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए और बीमारियों से बचाने के लिए कुछ प्राचीन संस्कार अपनाते हैं ताकि बच्चा निरोगी और बीमारियों से लड़ने में पूरी तरह से सक्षम रहे। बच्चों के लिए आयुर्वेद का वरदान है ‘स्वर्ण प्राशन’, उन्हें बलवान और बुद्धिमान बनाने के लिए जरूर कराएं स्वर्ण प्राशन संस्कार ।
प्राचीन संस्कारो में से एक है स्वर्ण प्राशन (Suvarnaprashan) संस्कार, यह सनातन धर्म के 16 संस्कारों में से एक संस्कार है जो बच्चे के जन्म से लेकर 16 वर्ष की आयु तक कराया जाता है। स्वर्ण प्राशन संस्कार आयुर्वेद चिकित्सा की वह धरोहर है जो बच्चों में होने वाली मौसमी बीमरियों से रक्षा करता है। बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य में स्वर्णप्राशन की बहुत अच्छी भूमिका निभाता है।
विस्तार से जानिए स्वर्ण प्राशन (Suvarnaprashan) संस्कार क्या है?
स्वर्ण प्राशन संस्कार स्वर्ण (गोल्ड) के साथ शहद, गाय का घी एवं ब्राह्मी आदि जड़ी बुटियों से निर्मित एक रसायन है। जिसका सेवन पुष्य नक्षत्र के दौरान किया जाता है। स्वर्णप्राशन संस्कार से बच्चों की शारीरिक एवं मानसिक गति में अच्छा सुधार होता है। यह बहुत ही प्रभावशाली और इम्युनिटी बूस्टर होता है, जो बच्चों में रोगों से लड़ने की क्षमता पैदा करता है। रीसर्च के अनुसार, स्वर्ण प्राशन संस्कार किए गए बच्चो में, जीवन के दूसरे पड़ाव में यह कैंसर जैसी घातक बीमारियां कम पाई जाती हैं ।
आयुर्वेद के क्षेत्र से जुड़े हमारे ऋषि मुनियों एवं आचार्यों ने हजारों वर्षों पूर्व वायरस और बैक्टीरिया जनित बीमारियों से लड़ने के लिए एक ऐसा रसायन का निर्माण किया जिसे स्वर्णप्राशन कहा जाता है। स्वर्ण प्राशन का अर्थ होता है स्वर्ण (सोना) का सेवन।
स्वर्ण प्राशन संस्कार कब और कैसे कराया जाता है?
भारत के प्राचीन 16 संस्कारों में स्वर्ण संस्कार भी एक प्रमुख संस्कार है। हिन्दू परंपरा के अनुसार जब किसी बालक का जन्म होता है तो हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार नवजात शिशु को सोने या फिर चांदी की सली (सलाई) से बच्चे की जीभ पर शहद चटाने या फिर ऊँ लिखने की प्राचीन परंपरा है। मगर आज के समय में बहुत कम लोगों को इसकी जानकारी है। जो माता-पिता इस संस्कार का पालन पूरे नियम के अनुसार करते है तो उनके बच्चों में रोगों से लड़ने की क्षमता बेहतर होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक माह पुष्य नक्षत्र (Pushya Nakshatra) आता है और उसी नक्षत्र के दिन बच्चे को आयुर्वेदिक जड़ी बुटियों से निर्मित रसायन पान कराया जाता है। यह क्रम लगभग 12 से 14 महीनों तक लगातार चलता रहता है.
स्वर्ण प्राशन कौन-कौन से बच्चे ले सकते है?
जन्म से लेकर 15 वर्ष की आयु तक के सभी स्वस्थ और अस्वस्थ बच्चे स्वर्ण प्राशन का रस पान कर सकते है। बहुत से लोगों के मन में यह प्रश्न भी उठ सकता है कि क्या इसके कोई दुष्परिणाम भी है क्या तो बता दें कि इसके एक भी दुष्परिणाम नहीं है। यह पूरी तरीके से नेचुरल है और यह पूरी तरह से सुरक्षित है।
स्वर्ण प्राशन संस्कार के महत्व क्या-क्या हैं?
स्वर्ण धातु सभी धातुओं में सबसे श्रेष्ठ धातु मानी जाती है। स्वर्ण धातु शरीर के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। यह बच्चों के विकास तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ाने में सबसे अच्छा योगदान देती है। इन सभी कारणों से ही हजारों वर्षों के बाद भी आज स्वर्ण प्राशन का महत्व बना हुआ है। आयुर्वेद के महान ऋषियों का मत था कि कैसे भी मानव शरीर में स्वर्ण (गोल्ड) की आवश्यकता अनिवार्य है। स्वर्ण प्राशन संस्कार से बच्चे के मानसिक और बौद्धिक क्षमता का विकास होता है। इसके द्वारा बालक के शरीर, मन, बुद्धि और वाणी का उत्तम विकास होता है।
स्वर्ण प्राशन संस्कार के लाभ –
आयुर्वेद के आदि आचार्य, जो कि कौमार भृत्य ( शिशु चिकित्सा विज्ञान) के आचार्य और स्वर्ण प्राशन के प्रणेता थे, उन्होंने अपनी रचित काश्यप संहिता में लिखा है, :
” सुवर्ण प्राशन हि एतत् मेधा अग्नि बल वर्धनं |
आयुष्यं मन्गलं पुण्यं वृष्यं ग्रहापहं ||
मासात् परम मेधावे व्याधिर्भिर्न्न च द्रुष्यते |
षड्भिर्मासै श्रुतधर सुवर्नप्राशाद भवेत् || “
स्वर्ण प्राशन मेधा, अग्नि ( पाचन शक्ति) , बल को बढ़ाने वाला है।
आयु को बढ़ाने वाला, मंगल मतलब शुभ , पुण्य मतलब कल्याण कारी है, बृष्य मतलब वीर्य को बढ़ाने वाला है, ग्रह ( मानसिक बीमारियों) बाधाओं को दूर करता है। एक मास सेवन से बच्चा परम मेधावी और निरोग होता है, और छ माह सेवन करने से बच्चा शृतिधर हो जाता है, मतलब जो भी सुनता है, उसे वह हमेशा की तरह याद हो जाता है।
आयुर्वेद विज्ञान के अनुसार स्वर्ण प्राशन के कई लाभ है जो आपके बच्चे को स्वस्थ बनाने के साथ-साथ गुणकारी, तेजस्वी, ऊर्जावान और बलवान बनाने में मदद करते है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है अर्थात सामान्य बच्चों के मुकाबले यह बालक जल्दी से बीमार नही होता है।
शारीरिक शाक्ति में वृद्धि होती है ।
मानसिक एवं शारीरिक विकास होने से बालक होशियार और बुद्धिमान बनता है।
पाचन तंत्र मजबूत होता है।
स्वर्णप्राशन से बैक्टीरियल और वायरस (कोरोना वायरस) संक्रमण से आसानी से बचा जा सकता है।
महामारी एवं मौसमी बीमारियों से बच्चों के स्वास्थ्य का ख्याल रखता है।
बालक सुन्दर मतलब रंग भी खिल उठता है और बच्चा बलशाली बनता है।
डॉ सोनम, शिलचर में हर महीने स्वर्ण के पुष्य नक्षत्र के दिन स्वर्ण प्राशन करवातीं हैं। आप अगर अपने बच्चे स्वर्ण प्राशन करवा कर उसे निरोग और मेधावी बनाना चाहते हैं,तो स्वर्ण प्राशन जरूर करवाए। और दिए गए नंबर (7636830901) पर संपर्क करें।

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