बढ़ता हुआ प्रदूषण

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वर्तमान समय में प्रदूषण सरकार के लिए तथा अधिकतर शहरों में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है वर्तमान समय में चारों ओर हरियाली मिटती जा रही है और प्रदूषण से दम घुट रहा है। वर्तमान समय में प्रदूषण बढ़ने के कई कारण है, बढ़ती हुई जनसंख्या के चलते खेतों के स्थान पर मकान बनते जा रहे है। बड़े बड़े कारखानों से निकलने वाला धुंआ और अनेक प्रकार जहरीली गैस वातावरण को दूषित कर रही है। सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों  से निकलने वाला धुआँ  वातावरण को दूषित कर रहा है। कई तरह की बीमारियां फैल रही है। नदियों का पानी जो हमारे लिए उपयोगी है, उसमें गंदा पानी तथा लोगों का मल मूत्र, मरे हुए जीव जंतु का शव, लोगों के मरे हुए शव बहाया जा रहा है। लोग खुली जगहों पर कूड़ा कचरा डाल रहे हैं जो कि वातावरण को दूषित करता है। आज प्रदूषण सरकार की नहीं बल्कि हर व्यक्ति का समस्या बनती जा रही है क्योंकि इसका सीधा प्रभाव जनजीवन पर पड़ रहा है। इसको दूर करने का उपाय सोचना होगा, कुछ उपाय जनता भी कर सकती है। जैसे कूड़े कचरे सही व्यवस्था, अपने घर के आस-पास का पानी नहीं रुकने देने का प्रयोग, पॉलिथीन का प्रयोग ना करें। इसके अतिरिक्त हम खुले स्थानों पर पेड़ लगाएं। इससे कुछ हद तक प्रदूषण से निपटा जा सकता है। नदियों के पानी को दूषित होने से बचाए रखने के लिए सरकार को सही व्यवस्था करना यानी सही कदम उठाने आवश्यकता है और इसके साथ-साथ हमारी जनता को भी अपना दायित्व निभाना अनिवार्य आवश्यकता है। कर्तव्य पालन स्रोत है क्योंकि इससे दृढ़ता और देश की सुरक्षा स्थिर हो सकती है। अपने जीवन में अपनाना चाहिए, सफाई पर ध्यान देना हमारा कर्तव्य है। इससे हमारे वातावरण शुद्ध होने से ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। कुछ हद तक कई बीमारियों से राहत पा सकते है। आज दिल्ली, महाराष्ट्र में जो करोना के समय ऑक्सीजन की मात्रा लोगों में कम देखी जा रही है। जो कि पेड़ों के कम होने के कारण कुछ हद तक ऑक्सीजन की मात्रा कमी आई है । उत्तर पूर्वांचल में करोना कमी देखी जा रही है और राज्यों की उपेक्षा ऑक्सीजन का जो मारामारी चल रहा है, असम और उत्तर पूर्वांचल में उसमें कमी देखी जा रही है। हमारे नजरिए से क्योंकि यहां  हरियाली ज्यादा है।
गोपाल देव समाजिक- कार्यकर्ता, दुमदुमा, तिनसुकिया

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