बराक घाटी ने खोया एक दूरदर्शी व्यक्तित्व – पार्थ सारथी चन्द

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बराक घाटी ने खोया एक दूरदर्शी व्यक्तित्व - पार्थ सारथी चन्द

रत्नज्योति दत्ता, 27 May – प्रतिष्ठित गुरुचरण कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य पार्थ सारथी चन्द सर की मृत्यु के कुछ दिनों बाद एक मिस्ड कॉल मुझे मिली। शिस्टाचार के नाते मैंने उस नंबर पर कॉल किया। दूसरे छोर पर कोलकाता से पार्थ सर की सबसे बड़ी भतीजी थी। व्यक्तिगत रूप से हम कभी नहीं मिले थे। सर के निधन होने के कारण वह काफी सदमे में थी। रोते-रोते वह अपनी दुःख प्रकट की, उसके बाद वह जो बोलीं उससे में अभिभूत हो गया। “छोटा आपको हमारे परिवार के एक सदस्यों के रूप में देखते थे।” पार्थ सर छोटी कहानियों के माध्यम से जीवन दर्शन के बारे में बात करते थे। उनका एक विशाल व्यक्तित्व था। मैं अक्सर दिल्ली से सर से बात करता था। लंबी बातचीत के दौरान मेरे प्रति उनका स्नेह को महसूस कर सकता था। एक जागरूप पत्रकार के रूप में, वह मेरी बात की सराहना करते थे। मुझे याद है, उन्होंने एक बार भविष्यवाणी की थी कि मैं एकदिन विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठन रॉयटर्स में पत्रकार के रूप में काम करूंगा। शायद, उन्हें मेरे पत्रकारिता की कौशल पर तभी से विश्वास था।  २००९ में जब रॉयटर्स में शामिल होने के बाद एक प्रशिक्षण शिबिर के लिए सिंगापुर में था, तब अचानक मुझे एक फ़ोन कॉल सिलचर से मिली थी। पार्थ सर ने रायटर्स में पत्रकार के नाते शामिल होने की बधाई दी थी। साथ में भविष्य के प्रयासों के लिए भी आशीवार्द दिए थे। में अक्सर कोविड-19 के इस कठिन समय उनसे दिल्ली से बात करता था। बर्तमान तालाबंदी के दौरान सर के ज्ञानवर्धक बातो की कमी रहेगी। “जीवन में जो मिला है वह काफी है। जीवन में छात्रों का प्यार और बराक के आम लोगों का स्नेह मेरे लिए जीबन की अमूल्य प्राप्ति है ।” सर की मन की यह बातें आज भी मेरे कानों में गूंजते हैं।

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