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भाजपा शासनकाल में दक्षिण असम ( बराकघाटी ) का विकास!!— राजन कुँवर

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स्वतंत्र भारत में सबसे लोकप्रिय शासक थे / प्रधानमंत्री थे स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जो प्रायः २९ राजनीतिक दलों के गठबंधन सरकार को सफलतापूर्वक छह वर्षों तक चलाया। अत्यंत प्रतिकूल परिस्थिति में अटलजी ने विपरीत विचारधाराओं के राजनीतिक दलो के संग गठबंधन करके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार चलाए थे। अतः मैं उनको सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री मानता हूँ। उन्होनें एवं उनके सहयोगी लालकृष्ण आडवाणी भारत में सबसे प्रथम इस प्रकार इतने दलो के गठबंधन सरकार की शासन प्रदान की जो वैचारिक रूप से भाजपा से भिन्न थे। भाजपा को दो सांसदो से लेकर सबसे बड़े दल तक उन सभी भाजपा के कर्मठ, सत्यनिष्ठ नेतागण तथा कार्यकर्ताओ ने पहुँचाया जो राष्ट्रवाद के विचारधारा से परिपूर्ण थे। भाजपा इस कारण ” एक अलग दल ” नाम से संबोधित किया जाता था। आज ऐसा नहीं हैं क्योंकि भाजपा में बहुत संख्यक दलबदलु , कांग्रेसी नेता आ गए हैं।
वाजपेयी सरकार को सबसे अधिक जाना जाता हैं सम्पूर्ण राष्ट्र में सड़क निर्माण के लिए। उनके समय ही प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना एवं शिलचर-पोरबंदर राजमार्ग परियोजना आदि आरंभ किया गया था। कांग्रेस अपने प्रायः ६० वर्षों के शासनकाल में भारत के सभी स्थानों पर सड़क ही नही बना पाया किंतु भाजपा गठबंधन की सरकार वाजपेयी के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सड़कमार्ग निर्माण प्रारंभ किया था। भारत सरकार द्वारा राजमार्ग निर्माण आज भी हो रहा हैं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मंत्री नीतीन गडकरी के नेतृत्व में। वह प्रथम व्यक्ति हैं जो  लगातार १० वर्षों से इस मंत्रालय में पूर्णमंत्री हैं एवं सफलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं। जब हम पूर्वोत्तर क्षेत्र की ओर देखते हैं तो हमें दिखाई देता हैं कि शिलचर से पोरबंदर तक राजमार्ग जो स्वर्गीय अटल जी के प्रधानमंत्री रहते हुए २००४ ई. में शिलान्यास किया गया था आज भी सम्पूर्ण नही हुआ २० वर्षों के पश्चात। उस वर्ष लोकसभा निर्वाचन में भाजपा गठबंधन की पराजय के पश्चात लगातार दश वर्षों तक कांग्रेस का शासन था भारत पर एवं असम सरकार भी कांग्रेस की थी २०१६ ई. तक। फलस्वरूप हम यह मान सकते हैं कि भाजपा विरोधी कांग्रेस शासनकाल में इस राजमार्ग का निर्माण नहीं किया गया या सम्पूर्ण नहीं हुआ। भाजपा लगातार आठ वर्षों से असम में भी सत्ता में हैं। संघ की सरकार एवं प्रदेश सरकार दोनों भाजपा गठबंधन की हैं आठ वर्षों से फिर भी स्वर्गीय अटल जी का स्वप्न पूर्व भारत को पश्चिम भारत से जुड़ना सड़कमार्ग द्वारा जिसे पूर्व  – पश्चिम गलियारा भी कहते हैं, आज भी असम्पुर्ण हैं। यह राजमार्ग सम्पूर्ण होने से दक्षिण असम, मणिपुर, मिजोरम एवं त्रिपुरा के करोड़ो निवासियों को शेष भारत से जुड़े रहने के लिए एक विकल्प सड़कमार्ग प्राप्त हो जाता। अभी हमलोग एकमात्र राष्ट्रीय राजमार्ग जो मेघालय होकर जाता हैं गुवाहाटी तक, उसके द्वारा शेष भारत से जुड़े हैं। यह राजमार्ग वर्षा के समय अधिकांश समय बंद रहता हैं भूस्खलन के कारण जिससे करोड़ो निवासियों के सामने खाद्यान्न सह दूसरे आवश्यक सामग्रियों की कमी हो जाती हैं क्योंकि यही एकमात्र राजमार्ग हैं जिसके द्वारा दूसरे राज्यों से यहाँ सामग्री पहुंचता हैं। त्रिपुरा एवं बराकघाटी तक मात्र रेलमार्ग हैं किंतु वर्षा के समय यह भी बंद हो जाता हैं डिमाहासाओ जनपद में भूस्खलन के कारण। इसका अर्थ यह हुआ कि दोनों सड़कमार्ग एवं रेलमार्ग बहुत दिनों तक बंद हो जाता हैं यहाँ स्थित राज्यों के लिए जिससे आवश्यक सामग्रियों का मूल्य अनियंत्रित रूप से बढ़ जाता है। यदि शिलचर – पोरबंदर राष्ट्रीय राजमार्ग आरंभ हो जाता हैं तो एक विकल्प सड़कमार्ग हमें प्राप्त होगा जिससे मणिपुर, मिजोरम सह त्रिपुरा एवं बराकघाटी के करोड़ो नागरिको को वर्ष के हर समय शेष भारत से जुड़े रहने में असुविधा नहीं होगा। कुछ लोगो ने जानने का अधिकार आवेदन द्वारा यह जानकारी प्राप्त किया हैं कि उल्लिखित राजमार्ग का मात्र ५० किलोमीटर असम्पुर्ण हैं जो डिमाहासाओ जनपद के भौगोलिक क्षेत्र के अंतर्गत हैं। क्या भारत सरकार के संबंधित सड़क निर्माण संस्था भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पास तकनीक या मानव संसाधन की कमी हैं मात्र यह पचास किलोमीटर सड़क सम्पूर्ण करने के लिए??? क्या भाजपा की भारत सरकार नही चाहती हैं स्वर्गीय अटलजी का स्वप्न सम्पूर्ण हो या इस सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार हो रहा हैं??? हम देखते हैं कि पहाड़ी राज्य अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में विपरीत परिस्थिति में ऊंचे क्षेत्रों में सड़क निर्माण हो रहा हैं। क्यों फिर पूर्वोत्तर के करोड़ों लोगो के संग अन्याय हो रहा हैं???
भारत का सबसे गहरा एवं इस पृथ्वी का एक विशालतम नदी हैं ब्रह्मपुत्र जो भारत से बंग्लादेश तक फैला हैं। बंग्लादेश में वह बंगाल की खाड़ी में गिरता हैं। इस बड़ी नदी का उपयोग होनी चाहिए असम तक आवश्यक सामग्रियों के परिवहन के लिए ताकि असम सह पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी राज्यों के निवासियो को सस्ते में खाद्यान्न सह सभी वस्तुएँ प्राप्त हो। इसके लिए भारत सरकार ब्रह्मपुत्र में बड़े वाणिज्यिक बंदरगाह का निर्माण करें। दुर्भाग्य की बात हैं कि लगातार चार वर्षों से संबंधित मंत्रालय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के मंत्री असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल रहते हुए भी असम में जलमार्ग का विकास नहीं हुआ अर्थात बड़े जहाजों से असम तक सामग्री नहीं आ रहा हैं। दक्षिण असम का सबसे बड़ा नदी बराक के भांगा क्षेत्र तक राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित हैं। यहाँ भी उचित स्थान पर बंदरगाह निर्माण करनी चाहिए। इन दोनो नदियों में जहाज चलाने के लिए भारत सरकार शीघ्र अपने पड़ोसी बंग्लादेश सरकार के संग आवश्यक समझौता करे क्योंकि पश्चिमबंगाल से बंग्लादेश होकर जहाज असम में आ सकता हैं। बराक नदी में हो सकता हैं शीत काल में ३/४ माह जहाज नहीं चले किंतु वर्ष के अधिकांश समय जहाज के द्वारा यहाँ दूसरे राज्यों से सामग्री लाया जा सकता हैं। दक्षिण असम, मिजोरम, मणिपुर में अधिकांश आवश्यक वस्तुएँ दूसरे प्रदेशों से आता हैं। भारत सरकार यदि इन नदियों में जलमार्ग विकसित करें तो यहाँ के करोड़ों निवासियों को सस्ते में खाद्यान्न सह दूसरे आवश्यक सामग्री प्राप्त होगा। हम सभी को अपने सांसद, विधायकों से यह मांग करनी चाहिए कि वह भारत सरकार के ऊपर दबाव बनाएँ, बाध्य करे कि यहाँ वाणिज्यिक रूप से सफल जलमार्ग का विकास करें। जब तक हम सशक्त रूप से मांग नही करेंगे तब तक हमें शिलचर – पोरबंदर राजमार्ग, शिलचर तक जलमार्ग या चंद्रनाथपुर से लंका तक विकल्प रेलमार्ग प्राप्त नहीं होगा। सरकार किसी भी राजनीतिक दल का हो हमें हमारी मांग को बार-बार रखना होगा तब जाकर संभव हैं हमें कुछ प्राप्त होगा। इसका उदाहरण हमारे सामने हैं, लामडिंग से शिलचर तक ब्राडगेज के लिए एवं असम विश्वविद्यालय के लिए दक्षिण असम के निवासियों ने लगातार संघर्ष किया था जिसका प्रतिफल हमारे सामने हैं।
असम में दूसरा सबसे अधिक जनपूर्ण नगर हैं शिलचर। इसके सड़कमार्गों की दुर्दशा बराकघाटी से शासकीय दल भाजपा के विधायक तथा सांसदो को दिखाई नही देता हैं। भिन्न संगठनों के द्वारा, नागरिको के द्वारा बार-बार यह मांग किया जा रहा हैं सड़को की सुधार करने के लिए। काछाड़ जिला के अधीन कालाइन से बिहाड़ा बाजार होकर बोरखला तक जो एकमात्र सड़क हैं जिसके द्वारा यहाँ के लाखों निवासी भारत के शेष भौगोलिक क्षेत्र से जुड़े हैं, इसे देखने से अभी सड़क नहीं कोई धान खेत लगता हैं। मई मास में संपन्न लोकसभा निर्वाचन में शिलचर आरक्षित संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रार्थी परिमल शुक्लवैद्य प्रचंड मतों से विजयी हुए हैं। उससे पूर्व वह लगातार आठ वर्षों तक असम सरकार में पूर्ण मंत्री रह चुके हैं, असम से एकमात्र भाजपा राजनेता जो पाँच बार विधायक रह चुके हैं किंतु फिर भी बराकघाटी की यह दुर्दशा हैं। शिलचर नगर में कचरा प्रबंधन की कोई वैज्ञानिक व्यवस्था नहीं हैं। भारत सरकार यदि संकल्प ले तो देश के बड़े नगरों में इंदौर के समान कचरा प्रबंधन स्थापित कर सकती हैं सभी प्रदेश सरकारों के सहयोग से। कम से कम भाजपा शासित राज्यों में यह सहजता से आरंभ किया जा सकता हैं। इंदौर देश का सबसे स्वच्छ नगर हैं। कचरा हमारे स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर समस्या हैं।
हमारी सरकारें स्वयं अपने आप कुछ नही करेगी, किसी भी राजनीतिक दल की सरकार हो। अतः हम नागरिकों को जागरूक एवं संगठित होना होगा इन आधारभूत संरचना जैसे सड़कमार्ग, जलमार्ग, कचरा प्रबंधन आदि आवश्यक समस्याओ के समाधान करने के लिए। भारत के मतदाता निर्वाचन में अपना मताधिकार का उपयोग करके शांत हो जाते हैं। वह अपने विधायक, सांसदो से अपनी इन गंभीर समस्याओ के समाधान हेतु सशक्त मांग नही करते हैं। वर्तमान के प्रौद्योगिकी युग में ट्वीट ( X ), ई-मेल आदि के द्वारा हम अपने जनप्रतिनिधियो से उचित मांग कर सकते हैं। इससे उनके ऊपर दबाव बनता हैं अपने दायित्व निभाने के लिए।

राजन कुँवर , बिहारा , काछाड़ जनपद (असम ), चलभाष – 6000870072

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