*भारतीय गोवंश संरक्षण से ग्राम विकास पर्यावरण सुरक्षा:- उमेश चन्द्र पोरवाल*

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*भारतीय गोवंश संरक्षण से ग्राम विकास पर्यावरण सुरक्षा:- उमेश चन्द्र पोरवाल*

*भारतीय गोवंश संरक्षण से ग्राम विकास पर्यावरण सुरक्षा:- उमेश चन्द्र पोरवाल*

*भारत के जीवन का आधार गाँव है गाँव के जीवन का आधार किसान है किसान के जीवन का आधार कृषि है कृषि के जीवन का आधार पशुधन है गोधन है* जिसका संरक्षण करना भारतीय संविधान के अनुसार हम सबका कर्तव्य है और धार्मिक दृष्टि से दायित्व है!

राष्ट्र जीवन के उद्धार के लिए ऋषि मुनियों ने समग्र चिन्तन करते हुए *गो विज्ञान* का अविष्कार किया गोवंश संरक्षण से ही ग्राम स्वावलंबन पर्यावरण सुरक्षा से भारत देश का गौरव बढ़ेगा गौरव शब्द गौ से बना है सहस्त्रों शब्द गौ से बने हैं *जैसे* गोपाल, गोविन्द, गोदावरी, गोवर्धन, गौ ग्रास, गोदान, गोदाम, गो लोचन, गोमुख, गोधाम, गोलोक, गोचर, गोयल, गोकुल, गौतम, गोपुर, गोकर्ण, गोधूलि, गौरी, गोपेश्वर, गोधा, गोवा, गोधरा, गोरखपुर, गोहाटी , गो पुरी, गोप्रेमी आदि..

भारतीय गोवंश ही भारतीय संस्कृति का परिचायक है गोसेवा, गो संरक्षण, गो संवर्धन, गोपालन, गोदान पंचगव्य भारतीयों के जीवन के अन्नय अंग है!

भारतीय गोवंश संरक्षण से गोपालन व गोवंश आधारित कृषि शुद्ध सब्जियां,फल, अनाज उत्पादन व अनेक गो उत्पाद निर्माण से दैनिक जीवन में उपयोगी दंतमंजन, धूपबत्ती, नहाने का साबुन, हवन बिस्कुट,हवन समिधा,वर्तनधोने का पाउडर, गोनाइल, शैम्पू,गोमय कण्डे आदि! व दूध, दही, घी, गोमय, गोमूत्र (पंचगव्य) से निर्मित मानव स्वास्थ्य वर्धक ओषधियाँ. गोमूत्र अर्क, आदि

आज सम्पूर्ण भारत देश के प्रमुख राज्यों की 43 प्रकार की भारतीय गोवंशीय नस्लें पाई जाती है जो सरकार द्वारा स्वीकृति है *जैसे:-* 1-आसाम में *लखीमी* 2- पशिचम बंगाल दार्जिलिंग और सिक्किम में *सीरी* 3- बिहार सीतामढ़ी में *बछौर* 4- उडिसा में *बींझारपुरी, घूमसारी, खरीआर,* 5- उडिसा आन्ध्रप्रदेश छत्तीसगढ़ में *मोटू* 6- छत्तीसगढ़ में *कोशली*

7- नांदेड़ महाराष्ट्र में *लालकंधारी* 8- बेलगाँव कर्नाटक, संगाली महाराष्ट्र में *कृष्णबैली* 9- सातारा, सोलापुर, सांगली महाराष्ट्र, कर्नाटक में *खल्लारी* 10- वर्धा, नागपुर विदर्भ महाराष्ट्र मध्यप्रदेश में *गवलाऊ*

11- नासिक अहमदनगर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश में *डांगी*

12- लातूर, परभणी और नांदेड़ महाराष्ट्र कर्नाटक में *देवनी* 13- महाराष्ट्र में *कोकन कपिला* 14- इन्दौर, देवास, उज्जैन मध्यप्रदेश में *मालवी* 15- खण्डवा, खरगोन मध्यप्रदेश में *निमाड़ी* 16- गुंटूर आन्ध्रप्रदेश में *ओगोंल* 17- चित्तुर आन्ध्रप्रदेश में *पुंगानुर* 18- हासन और चिकमंगलूर कर्नाटक में *अमृत महल* 19- पेरियार तमिलनाडु में *बारगुर* 20- इरोड व दिंडीगुल तमिलनाडु में *कांगायम* 21- तंजावूर और दिन्डीगुल तमिलनाडु में *उम्बलाचेरी* 22- तमिलनाडु में *पुल्लीकूलम* 23- छोटी कोट्टयम केरल में *बेच्चूर* 24- हरियाणा, चडीगढ में *बेलाही* 25- हरियाणा ,उत्तर प्रदेश, राजस्थान में *हरियाना* 26- जूनागढ़ , भावनगर, अमरेली गुजरात में *गीर* 27- कच्छ और मेहसाणा गुजरात, राजस्थान में *कांकरेज* 28 -नागौर राजस्थान में *नागौरी* 29- बीकानेर और श्रीनगर राजस्थान में *राठी* 30- कच्छ का रण बाड़मेर और जैसलमेर राजस्थान में *थारपारकर* 31- पंजाब, राजस्थान में *साहीवाल* 32- मैसूर और मण्डया कर्नाटक में *हल्लीकर* 33- कर्नाटक में मलनाड *गिड्डा* 34- उत्तराखण्ड में *बदरी* 35- उत्तर प्रदेश, बिहार में *गंगातीरी* 36- लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश में *खेरीगढ* 37- अलवर, भरतपुर राजस्थान , उत्तर प्रदेश में *मेवती* 38- पीलीभीत उत्तर प्रदेश में *पोंवार* 39- शासकीय व्यवस्था से *लाल सिंधी* 40- लद्दाख़ में *लद्दाख़ी*

*उपरोक्त नस्लों का नाम भारतीय गोवंश है* जो उपरोक्त नामों से जानी जाती है इन चित्र पहचान हेतु गो विज्ञान अनुसंधान केन्द्र देवलापार नागपुर महाराष्ट्र ने प्रकाशित किया है!

*प्राचीन काल में एक सौ से ज्यादा भारतीय नस्लीय गोवंश* हुआ करते थे!

*महाराजा दिलीप ने पुत्र प्राप्ति हेतु गुरु वशिष्ठ के आश्रम में जाकर सपत्नीक नन्दिनी गोमाता की सेवा की और गोमाता के आशीर्वाद से पुत्र रत्न प्राप्त हुआ उसी वंश में प्रभु श्री राम आये!*

भारतीय गोवंश के महत्व और उपयोगिता को बताने के लिए *भगवान श्री कृष्ण ने मनुष्य अवतार लेकर अनन्त गोसेवा एवं गो चारण किया और माखन प्रिय गोपाल गोविन्द कहलाये गोवंश और गोपालकों के कल्याणार्थ गोवर्धन पर्वत उठाया!*

 

भारतीय गोवंश संरक्षण से गोवंश आधारित कृषि से अनेक गो उत्पाद कुटीर उद्योग से शुद्ध स्वदेशी सात्विक आहार से ही सात्विक विचार निर्माण होतें है जिससे विवेक बुद्धि का विकास होता है जो सुख समृद्धि शान्ति से आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में एक कड़ी होगें!

भारत वर्ष के ऋषि मुनियों का चिन्तन रहा है *गावो विश्वस्य मातार: गावो रक्षित रक्षितः* अर्थात गाय विश्व की माता है गाय की जो रक्षा करता है गाय उसकी रक्षा करती है इसलिए वैदिक काल में जिसके पास जितना गोधन रहता था वह उतना ही गौरव शाली, वैभवशाली माना जाता था *जहाँ दस हजार गाय रहती है वह एक गोकुल कहलाता है जहाँ पांच हजार गाय रहती है वह उपनन्द कहलाता है जहाँ नौ लाख गाय रहती है वह नन्द कहलाता है जहाँ एक करोड़ गाय रहती है वह नन्दराजा कहलाता है!*

 

*भारत का प्राण तत्व गो, गंगा, गीता, गायत्री, गुरु और गांव है इसलिए यहाँ कहा जाता है मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्य देवो भव, और अतिथि देवो भव* की मान्यता है!

आज *भारतीय गोवंश ही श्रेष्ठ है सब मायनों में ऐसा वैज्ञानिकों ने भी सिद्ध किया* है भारतीय देशी गाय का दूध ए-2 जो मानव स्वास्थ्य के उत्तम है भारतीय गोवंश के ऊपर कुवड़ होता है एवं गल कम्बल होता है व सूर्यकेत नामक नाड़ी होती है माँ शब्द का संबोधन करती है उसके गोबर, गोमूत्र में अनेक उपयोगी खनिज तत्व पाये जाते हैं जिसके कारण अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पांच पेटेंट गोमूत्र अर्क एवं गोमूत्र, नीम, लहसुन फसल रक्षक के गो विज्ञान अनुसंधान केन्द्र देवलापार नागपुर महाराष्ट्र को प्राप्त हुए जिस में दो पेटेंट कृषि के लिए और तीन पेटेंट मानव स्वास्थ्य के लिए प्राप्त हुए है!

*ग्राम का विकास गो संरक्षण से होगा गुजरात अहमदाबाद के वंशीगीर गोशाला के संचालक गोपाल भाई सुतारिया जी एक खेती के लिए कल्चर तैयार किया है *गोकृपाअमृतम* जो एक सबसे अच्छा विकल्प है गोकृपाअमृतम वेद आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का समन्वय है जो भारतीय गोमाता का आज के समय में आशीर्वाद है इसके उपयोग से किसान भाई उत्तम खेती कर सकते है और किसान भाई सदा के लिए यूरिया,डीएपी और कीटनाशक (पेस्टिसाइट) से मुक्ति मिल सकती है! आज देश के सभी राज्यों में प्रमुख किसान इसका उपयोग कर लाभकारी सिद्ध हो रहें हैं!

*गोवंश संरक्षण से ग्राम का विकास पर्यावरण सुरक्षा* जमीन की घटती उर्वराशक्ति, पर्यावरण असन्तुलन एवं जल प्रदूषण, गिरता स्वास्थ्य, कुपोषण व गरीबी जैसी समस्याओं का पूर्णतः समाधान है गोवंश आधारित कृषि *गोकृपाअमृतम जो राष्ट्र के सर्वांगीण ग्राम विकास के लिए पर्यावरण रक्षक* है जैवविविधता को बनाये रखने वाली है स्वास्थ्य वर्धक एवं आरोग्य कारी है स्वावलम्बी है

कहा जाता है

*जिसके घर तुलसी और गाय उसके घर वैद्य न जाय* घर आंगन में तुलसी और घर के बाहर गाय यह दोनों साकारात्मक ऊर्जा निर्माण करती है दोनों के अनेकों गुण है!

गौ उत्पाद निर्माण से ग्राम विकास गोबर से अनेक गो उत्पाद धूपबत्ती, दंतमंजन, उपटन,साबुन, मच्छर क्वाइल, गमले, मूर्तियां, हवन कण्डे नेडप खाद, केचुआ खाद, जैविक खाद, वायोगैस, गो काष्ठ उपले आदि!

गोमूत्र से कीट नियंत्रण, फसल रक्षक, अमृत पानी, गोमूत्र अर्क, गो गोनाइल, शैम्पू आदि

जल संचय वर्षा का पानी एक बूंद भी बाहर न जाए गड्ढे बनाना या छोटे छोटे तालाब बनाना!

*प्रकृति की आत्मा है वृक्ष, पृथ्वी का श्रंगार है वृक्ष धरती माता का वैभव है वृक्ष* आज सबसे ज्यादा आक्रमण प्रत्यक्ष रूप से इसी प्रकृति पर हो रहे हैं प्रदूषण ज्वलंत समस्या है

इसके लिए प्रति परिवार 10 से 20 प्रकार के फलदार वृक्षारोपण करना काष्ठ युक्त 4 से 5 प्रकार के व औषधि युक्त वृक्ष 10 से 15 प्रकार के वृक्षारोपण करना चाहिए व विविध प्रकार की मौसमी सब्जियां फलदार वृक्षों की खेती करना ग्राम विकास पर्यावरण सुरक्षा के लिए *पूर्वज लोग गोचर चारागाह के लिए भूमि छोडते थे! सड़क किनारे फलदार वृक्ष लगाते थे! कुएं आदि बनवाते थे !यज्ञ, हवन, अग्निहोत्र परंपरागत पर्यावरण की रक्षा करते* हैं

मनुष्य प्रतिदिन 21 हजार 600 स्वांस लेता है अर्थात 16 किलो 200 ग्राम आक्सीजन प्राणवायु लगतीं हैं अत: मानव जीवन में वृक्ष का महत्व उतना ही अधिक है जितना जल और भोजन का है आज मनुष्य स्वांस संबंधी रोगों से ज्यादा ग्रसित है एवं अभी कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में ओक्सिजन की कमी से कई लोगों का शरीरांत हुआ इस महामारी में बचने के लिए जन मानस अपनी अपनी *प्रतिरोध क्षमता बढाने के लिए आयुर्वेदिक जड़ीबूटी गिलोय, तुलसी, दालचीनी, अदरक, हल्दी , कालीमिर्च, लोंग, नीम, नीबू* आदि का काढ़े के रूप में अधिक से अधिक उपयोग बढ़ा! देशी गाय का घी के दीपक जलाने से व यज्ञ करने से पर्यावरण शुध्द होता है एवं प्राणवायु ओक्सिजन प्राप्त होता है पर्यावरण संरक्षण के लिए शुद्धवायु के लिए स्पष्ट निर्देश धर्मग्रंथो में पाये जाते हैं भविष्योत्तरपुराणों के अनुसार युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से स्वर्ग जाने का सरल मार्ग क्या है पूछे जाने पर श्रीकृष्ण जी ने बदलाया की जो व्यक्ति अपने जीवन काल में 21 वृक्ष लगता है वह मोक्ष प्राप्त करता है *इस प्रकार 21 वृक्ष है.. पीपल एक, कड़वा नीम एक, कबीट एक, इमली दस, बड एक, बेल एक, आंवला एक, आम पांच* , इस प्रकार जो मनुष्य यह 21 वृक्ष लगता है वह मनुष्य जीवन सफल करता है! *इसीप्रकार पर्यावरण सुरक्षा हेतु पंचवटी के पांच पवित्र छायादार वृक्षों के समूह को पंचवटी कहते हैं पौराणिक ग्रन्थ स्कन्द पुराण के हैमान्द्री वृतखण्ड के अनुसार पीपल, बेल, बरगद, आंवला और अशोक इन पांच वृक्ष के समूह को पंचवटी कहा गया है इनको किस दिशा में लगाना शुभ होता है.. पीपल पूर्व दिशा में, बेल उत्तर दिशा में, बरगद पश्चिम दिशा में, आंवला दक्षिण दिशा में, और अशोक को आग्नेय कोण दक्षिण पूर्व में लगाना चाहिए* ! (पुराणों में दो प्रकार की पंचवटी का वर्णन है)

इसके साथ मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए *धन्वंतरि वाटिका भी लगानी चाहिए वह इस प्रकार है. आंवला, सीता, अशोक, नीम, अर्जुन, बेल, जामुन, मौल श्री, कचनार, अमलतास, निर्गुणी, अडूसा, हरसिंगार, गुडहल,गुलाब, पपीता, गिलोय, शतावरी, तुलसी, नागरमौथा, अदरक, हल्दी, केला, अश्वगंधा, घृतकुमारी, ब्राह्रमनीभुई, पुर्ननवा, हरड़, और बहेड़ा आदि प्रमुख पौधे हैं इन पौधों से तैयार वाटिका को धन्वंतरि वाटिका* कहते हैं जो मानव स्वास्थ्य व पर्यावरण रक्षक है!

*देह पर खाल, खाल पर बाल, धरती पर वृक्ष, वृक्ष पर छाल, देश पर योद्धा,योद्धा पर ढाल, धरती में जल, खेत में फसल, गाँव में गाय,घर में माय( माँ), मठ में महन्त, माला में मंत्र, प्रकृति का आशीष संस्कृति का भाल, अगर ये नहीं तो अस्तित्व का सवाल!!*

पर्यावरण संरक्षण हेतु परिवारों में विद्यालयों में जनजागृति द्वारा वृक्षारोपण के लिए जागरूक करना रासायनिक खादों व कीटनाशकों व प्लास्टिक का उपयोग को बन्द कराने का आग्रह करना!

*आज विश्व के कई देशों में लोग गाय के साथ घंटे के हिसाब से स्नेह करने जातें हैं और अपने मन को शांति मिले टेंशन दूर करने के लिए पैसा देकर गाय के पास है एक घंटा दो घंटा रहकर सेवा करते हैं अपने भारत में तो प्रत्येक परिवार में गाय होती भी गाय सुख समृद्धि का प्रतीक है इसलिए परमपूज्य श्री गुरु जी ने कहा है समास्याएं अनेक समाधान एक हमारी प्रिय गोमाता*

 

*भारतीय संस्कृति हमें सिखलाती है हम स्वस्थ रहे, प्रकृति स्वस्थ रहे, हवा और जल स्वस्थ रहे यानि गो संरक्षण से ग्राम का विकास गोवंश आधारित खेती हर मेड पर पेड़ हर घर आंगन में तुलसी पर्यावरण सुरक्षा का आधार है !*

जय भारत माता, उमेशचन्द्र पोरवाल

विश्व हिन्दू परिषद गोरक्षा सम्पर्क न. :- 7000967150

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