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रामलला परहित निमग्न

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विक्रम सम्वत् दो हजार अस्सि  ,
तिथि द्वादश पौष का शुक्ल पक्ष ,
 बाईस जनवरि दो हजार चौबीस ,
अभिजित मुहूर्त मृगशिरा काल ।१।
साकेत सलिल सरयू प्रवाह ,
अपलक निहारते पवनपुत्र ,
निज गृह प्रवेश आसन्न राम ,
पूरे परिसर में था उछाह ।२।
जय घोष निनादित कोटि कंठ ,
हाथों में ध्वज माला सुकंठ ,
समुपस्थित थे मस्तक त्रिपुण्ड,
तुलसी हनुमत् त्रिनयन भुशुंडि ।३।
यजमान प्रमुख  राजर्षि  मोदि,
गणपति करते थे वेद पाठ,
मंदिर गुंजित था शंखनाद ,
प्रतिमा सप्राण सर्वत्र आह्लाद ।४।
 प्रभु ने अपनी आंखे खोली ,
पुलकित रोमांचित सजल नयन ,
मोदी योगी आनंद बेनि   ,
 अति विह्वल मोहन रामभद्र ।५।
अद्भुत भगवद् विग्रह निहारि ,
भावातुर थे बापू मोरारि ,
बेसुध रविशंकर बागेश्वर ,
नि:शब्द कंठ थे रामदेव ।६।
साधू -साध्वी आलोक सुजन ,
रो उठे मधुर शैलेश सचिन,
सोनू अनूप कैलाश खेर ,
अनुपम सुधीर रजनी सुशील ।७।
छवि रामलला आनन्द मग्न,
हो उठा राममय सब त्रिभुवन ,
 अविराम राम का संकीर्तन  ,
पर रामलला परहित निमग्न ।८।
  – श्रीधर द्विवेदी,  24 जनवरी, 2024

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