राष्ट्र को सुदृढ बनाने के लिए हिंदी का उपयोग जरूरी है- बी एल वर्मा

पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय के हिंदी सलाहकार समिति की बैठक दिल्ली में संपन्न

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पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय के हिंदी सलाहकार समिति की बैठक दिल्ली में संपन्न


दिल्ली से विशेष प्रतिनिधि द्वारा, 28 सितंबर: राष्ट्र को सुदृढ बनाने के लिए हिंदी का उपयोग जरूरी है। जो भाषा देश में सबसे अधिक बोली जाती है, उस भाषा में काम करने से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा जा सकता है। जन जन तक पहुंचने के लिए जन भाषा का प्रयोग जरूरी है। आज हिंदी जनभाषा बनी हुई है। महात्मा गांधी ने भी देशवासियों से हिंदी का उपयोग करने की अपील की थी। उपरोक्त बातें विज्ञान भवन दिल्ली में आयोजित पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय के हिंदी सलाहकार समिति की बैठक को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने कहीं।

पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय के हिंदी सलाहकार समिति की बैठक दिल्ली में संपन्न
पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय के हिंदी सलाहकार समिति की बैठक दिल्ली में संपन्न

बैठक का प्रारंभ समिति के सदस्यों के स्वागत से हुआ। बैठक की अध्यक्षता कर रहे पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने सदस्यों को पूर्वोत्तर का जनजातीय दुपट्टा ओढ़ा कर सम्मान किया। तत्पश्चात बैठक में उपस्थित सदस्यों और पदाधिकारियों का परिचय हुआ। मंत्रालय के सचिव लोकरंजन जी ने स्वागत वक्तव्य दिया। संयुक्त सचिव अनुराधा जी ने मंत्रालय और उससे संबद्ध संस्थाओं के द्वारा राजभाषा अनुपालन की स्थिति की जानकारी दी तथा पिछली बैठकों का प्रतिवेदन पढ़ा।

राज्यमंत्री श्री वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने अपील किया है कि आगामी अमृत काल में देश को भाषाई दासता से मुक्त कराना है। उन्होंने कहा कि 14 सितंबर को सूरत में आयोजित राजभाषा सम्मेलन में तेजस्वी गृह मंत्री अमित शाह जी ने बताया कि हिंदी के साथ स्थानीय भाषाओं की कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। हिंदी स्थानीय भाषाओं की सखी है, हिंदी की समृद्धि से स्थानीय भाषाओं की समृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर की आबादी देश का 3.8 प्रतिशत है जबकि भौगोलिक हिस्सा लगभग 8% है। प्रधानमंत्री जी ने पूर्वोत्तर के विकास के लिए 10% राशि आरक्षित की है, एक कैबिनेट मंत्री और एक राज्य मंत्री दिया है। प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर के कायाकल्प का संकल्प लिया है। विभिन्न क्षेत्रों में इसका प्रभाव स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है, पिछले 8 वर्षों में सड़क, रेल, वायू कनेक्टिविटी बढ़ी है। प्रधानमंत्री पूर्वोत्तर प्लस सिक्किम को अष्टलक्ष्मी कहा है।

श्री वर्माजी ने बताया कि हिंदी खंड को समृदू करने के लिए पांच विश्वविद्यालय और 37 कॉलेजों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। जो राज्य हिंदी की शिक्षा दे रहे हैं और हिंदी का उपयोग कर रहे हैं, उनका विकास हो रहा है। जब तक व्यक्तिगत और व्यवहारिक जीवन में हिंदी को आत्मसात नहीं करते हैं तब तक उन्नति में बाधा बनी रहेगी। आज की बैठक के बाद हिंदी के प्रयोग में और गति लाने का प्रयास किया जाएगा।

बैठक में शिलचर के वरिष्ठ पत्रकार और समाजसेवी दिलीप कुमार ने कहा कि राजभाषा के अनुपालन के लिए नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति की नियमित बैठके होनी चाहिए, तिमाही रिपोर्ट भेजनी चाहिए, हिंदी के रिक्त पदों को तत्काल भर्ती कराया जाना चाहिए। अजीत वैश्य और डॉक्टर अनिल जैन ने कहा कि समिति की 4-6 महीने में एक बार बैठक होनी चाहिए। कार्यशाला में समिति के सदस्यों को भी आमंत्रित किया जाना चाहिए। विभिन्न विभागों में राजभाषा अनुपालन के लिए समिति के सदस्यों को दायित्व देना चाहिए। हरिशंकर भाऊ ने कहा कि हिंदी में अधिक से अधिक टिप्पणी करनी चाहिए और पुस्तकों की खरीद में 50 % से ज्यादा हिंदी पुस्तकें क्रय की जानी चाहिए‌। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति असम के मंत्री क्षिरोद कुमार शैकिया ने कहा कि पूर्वोत्तर के बारे में हिंदी में जो पुस्तके हैं, उन्हें खरीदना चाहिए ताकि साहित्यकारों का उत्साहवर्धन हो। पूर्वोत्तर के विश्वविद्यालयों में हिंदी संगोष्ठिया आयोजित की जानी चाहिए।

संयुक्त सचिव अनुराधा जी ने प्रगति विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमारे मंत्रालय और सभी विभागों में धारा 3(3) का अनुपालन हो रहा है। मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट द्विभाषी तैयार की जा रही है। वेबसाइट पर अधिकांश सामग्री का हिंदी अनुवाद हो चुका है। सभी कंप्यूटरों में हिंदी में काम करने की सुविधा है। मंत्रालय हिंदी के विकास के लिए पूर्ण रुप से प्रयासरत है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के 50 महाविद्यालू को चिन्हित किया गया है, जहां इसी महीने हिंदी पाठ्यक्रम प्रारंभ करने का प्रस्ताव है। धन्यवाद ज्ञापन उपसचिव विजय कुमार बालियान ने किया। अन्य उपस्थित सदस्यों में राज्यसभा सदस्य नबाम रेबिया, डॉ नगेंद्र कुमार कोलकाता, डॉ सत्येंद्र कुमार गाजियाबाद, सीताराम प्रकाश बंगलोर, अजय पराशर निदेशक जनसंपर्क एनईसी, संयुक्त सचिव अंशुमान उप सचिव अंकित मिश्रा आदि उपस्थित थे।

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