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लघुकथा देश सेवा — डोली शाह

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आज प्रातःकाल हम लोगो की नींद तो टूट गयी थी,फिर भी आलसवश   बिस्तर पर ही लेटे आराम कर रहे थे ,तभी राजू ने मुझसे कहा–
… आज वैलेंटाइन दिवस है, बोलो तुम्हें  क्या तोहफा चाहिये?
…….  जो मांगूंगी, वह मिलेगा!
…..हां,  मांग कर तो देखो
……..ना तो नहीं करोगे ।
…….अरे नहीं ,बोलो तो ऐसा क्या चाहिए ?
…….बेटा रवि , वायु सेना की इंटरव्यू में जाने के लिए बहुत उत्सुक है,उसे  जाने दो,और जरूरी तो नहीं कि उसका  चयन हो ही जाए , पर प्रयास तो हम कर सकते हैं ।प्रयास करने में क्या दिक्कत है ?
………यह तुम क्या बोल रही हो? तुम कैसी मां हो? जानती हो एक बार वायु सेना में भर्ती होने के बाद उसकी अपनी जिंदगी अपनी नहीं होती। कभी-कभी तो ऐसा भी हो जाता है कि घर पर अपनो का मृत्यु हो जाने पर भी  बेटा मुंह देखने तक नहीं आ पाता।
 ……. अगर सब के मां- बाप ऐसा ही सोच ले तो फिर देश की सुरक्षा दुश्मनों से कैसे होगी।आप  देश के एक अच्छे  नागरिक  होकर  ऐसा कैसे सोच सकते हैं ?मां-बाप को अपने बच्चों की सेना में भर्ती होने पर तो गर्व होना चाहिए।  यदि हर घर में यहीं सोच हो तो  बॉर्डर पर कौन खड़ा होगा। देश की सेनाओं के बल पर ही हम रात के अंधेरे में चैन की नींद सो पाते हैं ,मैने अवसर का लाभ लेते हुए अनुरोध के स्वर मे कहा-प्लीज ,आप अपने वादा से नहीं मुकर सकते,आपको वादा पूरा करना होगा।
  ……..ठीक है भेजो उसे   इन्टरव्यू मे !
…… अब  मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा कयोंकि मुझे बचपन से ही शौक था कि मैं एक सैनिक की पत्नी बनू। शादी से वह अभिलाषा तो पूरी न हो सकी थी पर  आज अवसर आया है तो  अपने बेटे की रूप में  ही पूरा करना चाहती हूं।
    — इन्टरव्यू का परिणाम निकला। रवि परीक्षा मे सफल हो गया था।आज कार्यरत हुए करीब लंबा समय बीत गया।  आज अपने बेटे को देख मानो मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता,हर मां के लिए यह बहुत गर्व का विषय है कि उसका बेटा देश की सेवा के लिए तत्पर है…।
             डोली शाह
    निकट- पी एच ई
पोस्ट -सुल्तानी छोरा
जिला- हैलाकंदी
असम -788162
मोबाइल-9395726158

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