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श्रीकृष्ण रुक्मिणी कलाक्षेत्र द्वारा मनाया गया प्रथम अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा उत्सव

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भारतीय सांस्कृतिक उत्सव भी प्रारम्भ १६ मार्च तक चलेगा
शिलचर, 22 फरवरी: काछार जिले में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का पालन किया गया। श्रीकृष्ण रुक्मिणी कलाक्षेत्र ने १४ मार्च २०२३ से २१ फरवरी २०२४ तक लागातार ७० दिवस तक प्रतिदिन आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा उत्सव के साथ – साथ पहला भारतीय सांस्कृतिक उत्सव भी मनाया। इस अवसर पर “मातृभाषा-मातृभूमि @ इमाठार-इमालाम @ मा-ग्राउ मा-थानि @ इमालोन -इमालैवाक” शीर्षक सेमिनार के साथ विश्व महावीर चिलाराय की प्रतिमा स्थापित करने हेतु भूमि पूजन भी किया गया। काछार जिले के वीर भूमि दक्षिण बेकिरपार (खमपाल) इलाके में आयोजित समारोह में श्रीकृष्ण रुक्मिणी कलाक्षेत्र के प्रमुख विधान सिंह के विशेष आमंत्रण पर अखिल असम भोजपुरी परिषद काछार इकाई के अध्यक्ष युगल किशोर त्रिपाठी के अगुवाई में परिषद के महासचिव शुभम राय, उपाध्यक्ष अनंतलाल कुर्मी, सांगठनिक सचिव मनोज कुमार साह, सांस्कृतिक सचिव किरण त्रिपाठी और प्रचार सचिव योगेश दुबे ने हिस्सा लिया। परिषद के अध्यक्ष त्रिपाठी मुख्य अतिथि तथा बतौर विशेष अतिथि ब्रज गोपाल सिन्हा, सम्मानित अतिथि के रुप में पण्डित नीलमाधव सिंह (गीतादूतम), पण्डित हरि कान्त सिंह (गीतादूतम), अलका देवी और बीरेन्द्र चन्द्र सिंह मौजूद रहे। इसके अलावा विभिन्न कॉलेजों के प्रोफ़ेसर और साहित्यिक क्षेत्र तथा 1971 के कई वीर योद्धा मणिमय सिंह और बागीन्द्र सिंह भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य एवं अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। संस्कृत प्रहरी प्रकाश सिंह ने सरस्वती वंदना किया। विधान सिंह व कलाक्षेत्र की शिल्पी विजय लक्ष्मी, मायावती, चामेली, शीला, आरती, वासन्ती, सुलता, नीभा, लक्ष्मीसेना आदि ने आमंत्रित सभी अतिथियों को असमिया अंग वस्त्र ओढ़ाकर स्वागत व सम्मान किया। परिसर में विश्व महावीर चिलाराय की प्रतिमा स्थापित किया जाएगा, इसके लिए भूमि पूजन हुआ। बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं ने कीर्तन किया। विधान सिंह ने आयोजन के संबंध में जानकारी साझा की। आयोजन के उद्देश्यों और अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए उन्होंने साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं मातृभाषा को लेकर चल रही गतिविधियों पर प्रकाश डाला। गीतादुतम हरिकान्त सिंह ने विष्णुप्रिया मणिपुरी एवं स॔स्कृत भाषा की चर्चा की। अखिल असम भोजपुरी परिषद, काछार इकाई के अध्यक्ष युगल किशोर त्रिपाठी ने अपने संबोधन में विधान सिंह द्वारा जारी तमाम पहलों जैसे श्रीकृष्ण रूक्मिणी कलाक्षेत्र को सांस्कृतिक विश्वविद्यालय में लाने का प्रयास, महाभारत काल में पाण्डवों द्वारा पुजित भगवान विष्णु का मूर्ति को जर्मानी से भारत में वापस लेने की मांग, अमर जवान शहीद वेदी स्थापन, पवित्र रुक्मिणी नदी को ‘हेरिटेज रीवर’, महापुरुष श्रीमन्तशंकरदेव, महावीर लाचित वरफुकन, विश्व महावीर चिलाराय, भारत के तदानीनतन प्रधान मन्त्री अटल बिहारी बाजपेयी की प्रतिमा आदि स्थापित करने का प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के प्रयास युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगा। अखिल असम भोजपुरी परिषद अच्छे कामों के लिए हर संभव साथ है।

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