स्वतंत्रता दिवस २०२१ पर डॉ हिमंत विश्वशर्मा के विचार

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स्वतंत्रता दिवस २०२१ पर डॉ हिमंत विश्वशर्मा के विचार

हमारे देश के साथ-साथ हमारा राज्य भी १५ अगस्त, २०२१ को ७५वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी में है। मैं उस गौरवशाली क्षण के उत्सव की पूर्व संध्या पर भारत के लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को दिल की गहराइयों से याद कर रहा हूं। ऐसे समय में देश के लोगों और विशेष रूप से असम के हर नागरिकों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देता हूं। पांच हजार साल पुरानी भारत की सभ्यता स्थल से विदेशियों को निर्वासित कर स्वराज की स्थापना करना और फिर आजादी के ७५ वर्ष की उम्र में शान से प्रवेश करना, भारत के हर नागरिक के लिए गर्व की बात है। गुलामी से मुक्ति हर इंसान का परम वांछित सपना होता है।
दरअसल पूरी मानव जाति का इतिहास गुलामी से आजादी की कहानी है। यही कारण है कि १५ अगस्त, १९४७ संपूर्ण मानव जाति के नए विकास की शुरुआत के सूचना का पर्व था। महात्मा गांधी ने कहा था कि भारत की आजादी केवल इस देश के लोगों की मुक्ति का संकेत नहीं देती है। भारत की मुक्ति के साथ जुड़ा है, दुनिया के अनगिनत पराधीन लोगों की मुक्ति का सपना। भारत मुक्ति आंदोलन को असहयोग आंदोलन के माध्यम से लोगों का काफी जनसमर्थन मिला। १९२० में महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन का आह्वान किया। उस वर्ष सितंबर में कोलकाता में कांग्रेस के अधिवेशन में गांधी के आह्वान को अपनाए जाने के बाद आज से ठीक सौ साल पहले १९२१ में असहयोग आंदोलन ने पूरे देश में बड़ा मोड़ ले लिया था।
उस समय लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन में व्यापक रूप से भाग लिया था। गुवाहाटी, तेजपुर, नगांव, जरेहाट, शिवसागर, डिब्रूगढ़, लखीमपुर और बराक घाटी सहित असम के विभिन्न हिस्सों में असहयोग आंदोलनों से प्रमुख लोग जुड़ गये। इन प्रमुख लोगों में हम कर्मबीर नवीन चंद्र बरदलै, देशभक्त तरुणराम फुकन, मौलाना तैय्यबुला, विष्णुराम मेधी, सिद्दीनाथ शर्मा, गोपीनाथ बरदलै, अमिय कुमार दास, हेमचंद्र बरुवा, चंद्रनाथ शर्मा, अंबिकागिरी राय चौधरी, प्रसन्नलाल चौधरी, मरीम बोरा, देवेश्वर शर्मा, बेणुधर शर्मा आदि को याद करना चाहते हैं।
असहयोग आंदोलन विदेशी शासन और विदेशी व्यापार का बहिष्कार करने का जो आदर्श था, उस आदर्श का नाम असहयोग आंदोलन था। सरकारी कार्यालयों, न्यायालयों, शिक्षण संस्थानों और विदेशी कपड़े, विदेशी सूट, शराब, भांग, अफीम आदि का बहिष्कार किया गया। महात्मा गांधी के आह्वान पर देश में सूती धागा काटकर कपड़ा बनाया गया। असम के घर-घर में पुरुष और महिलाएं धागा काटने में व्यस्त देखे गये। वर्ष २०२१ महात्मा गांधी के प्रथम असम आगमन के १०० साल पूरा होने का वर्ष है। अगस्त १९२१ में गांधीजी की पहली यात्रा से असम में स्वराज आंदोलन की जागृति आई थी। १९४२ के भारत छोड़ो आंदोलन में गांधी जी ने भारत की जनता को संदेश दिया था- करेंगे या मरेंगे। महात्मा के शब्दों को स्वीकार करते हुए समूचे भारत के साथ-साथ असम के आजादी की चाहत रखने वाले लोग अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष में कूद पड़े। उस आंदोलन में अंग्रेजों की गोलियों से कुशल कोंवर, तिलक डेका, कनकलता बरूवा, मुकुंद काकोती, भोगेश्वरी फुकननी, मंगल कुर्मी, हेमराम पातर, रतन कछारी, मदन बर्मन, राउता कोच, लेरेला बोरा आदि अनेक लोग शहीद हुए थे। इन्ही के आत्मबलिदान और देशवासियों के त्याग के अंत में १५ अगस्त, १९४७ को अंग्रेजों को भारत की आजादी देने के लिए मजबूर होना पड़ा। भारत के मुक्ति संग्राम की पृष्ठभूमि में २०२१ का विशेष महत्व है। इस साल देश आजादी की महारजत जयंती मना रहा है। आजादी का अमृत महोत्सव शीर्षक के साथ गत १२ मार्च को साबरमती आश्रम से महावत्सव का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस अमृत महोत्सव का अर्थ है स्वतंत्रता की शक्ति का अमृत, स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेरणा का अमृत, नए विचारों का अमृत, नए संकल्प का अमृत। यह स्वावलंबन का अमृत है। यह पर्व देश को आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रेरित करेगा। लंबे ७५ वर्षों में भारत अपनी स्वतंत्रता को बनाए रखकर आर्थिक और सामाजिक विकास के नौ स्तरों का निर्माण करने में सफल रहा है। असम ने भी विकसित भारत में अपनी नई सुबह की शुरुआत की है। आत्मविश्वास से लबरेज असम का सपना धीरे-धीरे हकीकत की राह पर बढ़ रहा है। सवा सौ साल पुराने ओलंपिक के इतिहास में इस बार असम ने लवलीना बरगोहाईं के साथ पहला पदक जीतने का रिकॉर्ड बनाया। लोगों ने राज्य की नवनियुक्त सरकार को साहस और प्रेरणा दिया है कि वह अपराध मुक्त और समस्या मुक्त असम बनाकर असम के विकास को नया आयाम दे। आने वाले समय के लिए यह बहुत अच्छा संकेत है।
आज हमने आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर असम के निर्माण के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ने का संकल्प लिया है। हम लोगों की प्रेरणा और शुभआशीष से इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अंत में स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मैं एक बार फिर सभी लोगों को बधाई देता हूं और अभिनंदन करता हूं।

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