हनुमान धाम में ईट भट्ठा व्यवसायी स्व. संजय सिंह की शोक सभा आयोजित

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हनुमान धाम में ईट भट्ठा व्यवसायी स्व. संजय सिंह की शोक सभा आयोजित

काछाड़ ब्रिक्स एसोसिएशन,शिलचर द्वारा हाल ही में दिवंगत स्टार्स ईट-भट्ठा के मालिक सरयुग सिंह के ज्येष्ठ पुत्र संजय कुमार सिंह (४४) की शोक सभा का आयोजन शिलचर तारापुर स्थित हनुमान धाम में किया गया।
उदय शंकर गोस्वामी की अध्यक्षता में आयोजित शोक सभा में उपस्थित सभी ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि प्रदान कर श्रद्धा निवेदन किया।

इस सभा में ब्रिक्स एसोसिएशन, हनुमान धाम सेवा समिति,बराक हिन्दी साहित्य समिति व अन्यान्य संगठनों के सदस्य उपस्थित थे। उदय शंकर गोस्वामी के अलावा रामस्वार्थ सिंह, अरुण कुमार महतो, संतलाल सिंह, दुर्गेश कूर्मी, दिलीप कुमार, लक्ष्मण सिंह, मदन सिंह, अपर्णा तिवारी और अन्यान्य लोगों ने स्वर्गीय संजय के गुणों को याद करते हुए उनकी मृत्यु से समाज की  अपूरणीय क्षति  बताया। सभी ने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त किया। इस सभा में उपरोक्त लोगों के अलावा चन्द्र शेखर सिंह, अरविंद सिंह, वीरेंद्र सिंह, इंद्रजीत तिवारी, मनोज कुमार सिंह, बालेश्वर सिंह, रामानंद सिंह तथा  हनुमान धाम के पूजारी अवधेश जहां और अन्यान्य लोग उपस्थित थे।सभा के अन्तमें दो मिनट का मौन धारण कर विदेही आत्मा की शांति व सद्गति कामना की गई।ॐ  शान्ति ध्वनि उच्चारण कर सभा की समाप्ति घोषणा की गई।

उल्लेखनीय है कि स्टार ब्रिक्स उधारबंद के मालिक सरजुग सिंह के ज्येष्ठ पुत्र संजय सिंह का 27 जून को चिकित्सा के दौरान दिल्ली के मेदांता हॉस्पिटल में असामयिक निधन हो गया। 44 वर्षीय संजय सिंह का पिछले वर्ष ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन हुआ था। कोई ठीक हो कर घर भी आ गए थे। लगभग 1 साल बाद चेकअप के दौरान ट्यूमर के फिर से एक्टिव होने की जानकारी मिली तो 10-12 दिन पहले दुबारा ऑपरेशन किया गया। दुबारा ऑपरेशन के बाद लगभग ठीक हो चले संजय सिंह को तीन-चार दिन पहले सांस लेने में कठिनाई महसूस हुई। उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया, उन्हें खाना खाने में तकलीफ हो रही थी। 27 जून को सुबह 9:00 बजे चिकित्सकों के सारे प्रयासों को व्यर्थ करते हुए संजय सिंह की आत्मा परमात्मा में विलीन हो गई। मूल रूप से वैशाली जिला के पातेपुर थाना अंतर्गत नौराडीह गांव के निवासी संजय सिंह का  अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में किया गया। व्यवहार कुशल, मृदुभाषी, हंसमुख स्वभाव के संजय सामाजिक रूप से कर्मठ और सक्रिय व्यक्ति थे। वे अपने पीछे माता-पिता, पत्नी- बच्चे और छोटे भाई सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए।

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