हर घर में तिरंगा फहराये- डॉक्टर श्रीधर द्विवेदी

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हर घर में तिरंगा फहराये

किसने हुंकार भरी थी यह ,

‘मैं अपनी झाँसी नहीं दूँगी ‘,

किसने ललकारा गोरों को ,

‘है स्वतंत्रता जन्माधिकार ‘I

‘अंग्रेजों अब भारत छोड़ो ‘

यह नारा किसने किया बुलंद,

उद्घोष किया था यह किसने ,

‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूँगा ‘I

‘कलम आज उनकी जय बोल’

किसके थे ये बोल ,

‘भगवान भारतवर्ष में गूँजे हमारी भारती’ ,

किसने लिखकर

सबका लिया ह्रदय टटोल I

‘सत्यमेव जयते ‘ कहकर,

किसने मशाल दिखलायी ,

वह कौन महाभट था जिसने ,

डायर को मृत्यु दिलायी I

हाथों में राष्ट्रध्वजा लेकर ,

कितने अनाम कितने असंख्य ,

बलिदान हुए औ रुधिर बहे ,

कितनों ने अपने प्राण दिये I

तब जाकर आया यह शुभ दिन ,

उन्निस सैतालिस पंद्रह अगस्त ,

हो गये ब्रिटिश हौसले पस्त ,

सर्वत्र तिरंगा जन गण मन I

बज उठे बिगुल ,

बज उठी हिन्द की शहनाई ,

उन्मुक्त राष्ट्र ने ली अंगड़ाई ,

नाचा झूमा पूरा भारत भाई भाई I

हर घर प्रसन्नता निज निसान ,

आबाल वृद्ध झूमे किसान,

हर हाथ तिरंगा लहराया ,

हर तरफ तिरंगा फहराया I

नेहरू पटेल शास्त्री कलाम ,

इंदिरा अटल नरसिम्ह राव ,

राजेन बाबू राधाकृष्णन,

थे प्रणव हिन्द जैसे ललाम I

ले राष्ट्र पताका हाथों में ,

करगिल गलवन निज शीश दिये,

फहरा त्रिवर्ण मंगल मयंक ,

अंकार्टिक औ अंबुधि सुअंक ।

शिक्षा क्रीड़ा कृषि प्रविधि क्षेत्र ,

अब नवाचार आयुध प्रक्षेत्र ,

सीमाओं पर सैनिक सचेत ,

संस्कृति संस्कृत काशी त्रिनेत्र I

आजादी का अमृत उत्सव ,

यह वीर हुतात्मा दीपोत्सव ,

मंजुल कृतज्ञता का उत्सव ,

जन जन हृद बने महोत्सव यह ।

अब लालचौक से लालकिले ,

कामाक्षि कच्छ रामेश्वर तक ,

हर दिल में तिरंगा बस जाये ,

सर्वत्र तिरंगा छा जाये ,

हर घर में तिरंगा फहराये ।

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