आखिरी बार पिता ने बेटियों को पुकारा था… मगर कोई नहीं आया
शहर के पुराने कपड़ा बाजार में रघुनाथ अग्रवाल की छोटी-सी दुकान थी—“रघुनाथ वस्त्र भंडार।” दुकान बड़ी नहीं थी, लेकिन रघुनाथ की मेहनत बहुत बड़ी थी। सुबह दुकान खोलने से पहले वह अपनी पत्नी सरोज के साथ भगवान के सामने हाथ जोड़कर बस एक ही प्रार्थना करते— “हे भगवान… मेरी बेटियों को हमेशा खुश रखना।” रघुनाथ … Read more