ढे़कियाखोवा ब’र नामघर
जिस गांव में खाया था गुरु माधव देव ने ढ़ेकिया पात का साग और भात,उस गांव का नाम पड़ा ‘ढ़ेकिया खोवा’।कहते हैं करीब पांच सौ साल पहले सन् 1528 ई. में,गुरु माधव देव जी यहां ठहरे थे, एक बुजुर्ग दम्पति के घर में,और भोजन में ग्रहण किया था उक्त साग ‘ढ़ेकिया साग’।इसी गांव में नामघर … Read more