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सम सामयिक लेख

काबुल में भारत अब क्या करे ?-डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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यह तो अच्छी बात है कि भारत सरकार की तालिबान से दूरी के बावजूद उन लोगों ने अभी तक भारतीय नागरिकों को किसी भी...

सौ दिवसीय कार्य का अनुभव – डॉ हिमंत विश्व शर्मा

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हमारी नई सरकार ने 100 दिन पहले जनता के शुभाशीष और आशीर्वाद के साथ शपथ ग्रहण किया था। हमने अपनी यात्रा की शुरुआत सार्थक...

पाकिस्तान के लिए दिलीप कुमार का दिल धड़कता था   –  विष्णुगुप्त

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राष्ट्र-चिंतन   सच बहुत ही कड़वा होता है , अप्रिय होता है , सबको पचता नहीं है,  सब को स्वीकार नहीं होता,  सच बोलने वाले को...

डिजिटल विचार -सुनील शर्मा

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डिजिटल विचार -सुनील शर्मा लो जी अब तो बंगाल में हद ही हो गई फसल बोये बीजेपी और काटे टीएमसी। कितने प्रेस से बीजेपी के...

नया मंत्रिमंडलः साहसी पहल- डॉ. वेदप्रताप वैदिक

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भाजपा सरकार ने अपने कुछ नए राज्यपाल और नए मंत्री लगभग एक साथ नियुक्त कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पिछली पारी...

भारतीय राजनीति के ‘मौसम वैज्ञानिक’ वनने की पृष्ठभूमि -रत्नज्योति दत्त-

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जब मुझे पिछले साल केंद्रीय मंत्री रामबिलास पासवान की दुखद मौत के बारे में पता चला, तो मुझे इस अनोखे व्यक्तित्व की याद ताजा...

शीर्ष न्यायालय के फैसले से तस्वीर स्पष्ट होगी- अवधेश कुमार

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पिछले वर्ष हुए दिल्ली दंगों के तीन आरोपियों देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और आसिफ इकबाल को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत और...

व्यंग लेख ‘हताशा के सुर !’

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'हताशा के सुर !' लो जी अब तो हद ही हो गई, हम तो बेकार में पप्पू गांधी को अविकसित बयानों के लिए दोषी ठहरा...

तीसरे मोर्चे की कवायद सिर्फ राजनीतिक कसरत अवसरवादी राजनीति को बढ़ावा

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राजनीति में तथा प्यार में सबकुछ जायज माना जाता है.इसलिए कब ओर कहाँ अनमेल गंठबंधन वो भी भाजपा एवं कांग्रेस के इतर तीसरा मोर्चा...

लोकतंत्र या परलोकतंत्र • सुनील शर्मा, शिलचर

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लोकतंत्र या परलोकतंत्र • सुनील शर्मा, शिलचर लो जी बंगाल के चुनाव निपट गये, एक पार्टी निपट गई और दूसरी निपटा रही है। बलात्कार, हत्या...

ताजा खबरे

बोड़ो जाती के लोगो को अब अस्त्र शस्त्र उठाने का समय...

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कोकराझार , 20 सितंबर । कोकराझार के उल्टापानी में हुवे मुटभेड़ में मारे गए दो युवकों की घटना बहुत दुखत है। यह मंतव्य बीटीआर...

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