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क्या सीट बंटवारे को लेकर अखिलेश यादव के आगे झुकी कांग्रेस, सुनने पड़ रहे है बगावती स्वर ? -अशोक भाटिया

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लोकसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन तो हो ही गया है. सपा ने कांग्रेस को यूपी में 17 सीटें दी हैं. जबकि कांग्रेस 22 सीटों की मांग रही थी. सूत्रों के मुताबिक सपा के दबाव के आगे कांग्रेस को झुकना पड़ा, कांग्रेस के अपने बड़े नेताओं के लिए भी सीटें नहीं ले पाई. जिसके बाद अब कांग्रेस के अंदर खुलकर बगावत देखने को मिल रही है. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इस गठबंधन के खिलाफ आवाज उठाई हैं.

सपा-कांग्रेस के बीच हुई सीट शेयरिंग को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने अब बग़ावती तेवर दिखाए हैं. दरअसल, वो यूपी की फर्रुखाबाद सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन ये सीट सपा के खाते में चली गई है. जिसके बाद उन्होंने अपनी नाराज़गी खुलकर जारी की और एक्स पर लिखा, ‘फ़र्रुख़ाबाद से मेरे रिश्तों के कितने इम्तहान का सामना करना पड़ेगा? सवाल मेरा नहीं पर हमारे सब के मुस्तक़ाबिल का है, आने वाली नस्लों का है. क़िस्मत के फ़ैसलों के सामने कभी झुका नहीं.. टूट सकता हूँ, झुकूँ गा नहीं. तुम साथ देनेका वादा करो, मैं नघमे सुनाता रहूँ’

सलमान ख़ुर्शीद अब तक इस सीट से दो बार सांसद रहे हैं. उन्होंने साल 1991 में पहली बार चुनाव जीता था और फिर आख़िरी बार 2009 में इस सीट पर क़ब्ज़ा किया था. हालांकि पिछले दो आम चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. दोनों बार यहाँ से बीजेपी के मुकेश राजपूत की जीत हुई. साल 2014 में सलमान ख़ुर्शीद चौथे नंबर पर रहे. उन्हें सिर्फ़ 95,543 वोट मिलें और वो चौथे नंबर पर रहे. दूसरे और तीसरे नंबर पर सपा और बसपा रहे.

इसी तरह साल 2019 में सलमान ख़ुर्शीद तीसरे नंबर पर रहे हैं, लेकिन ये चुनाव सपा-बसपा ने मिलकर लड़ा था. ऐसे में बसपा का कैंडिडेट दूसरे नंबर पर रहा और सलमान ख़ुर्शीद को सिर्फ़ 55,258 वोट मिले और वोट प्रतिशत 5.51 रहा.

सूत्रों के मुताबिक़ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय खुद बलिया या घोसी सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे. इसी तरह रामपुर सीट से पूर्व सांसद बेगम नूर बानो, लखनऊ ईस्ट से राज बब्बर और भदोही सीट से कांग्रेस नेता राजेश मिश्रा चुनाव लड़ना चाहते थे. लेकिन ये सीटें कांग्रेस को नहीं मिल पाई.कांग्रेस को जो 17 सीटें मिली हैं. उनमें कांग्रेस अमेठी, रायबरेली, कानपुर नगर, सीतापुर, फतेहपुर सीकरी, बांसगांव, प्रयागराज, महराजगंज, वाराणसी, बाराबंकी, देवरिया, अमरोहा, झांसी, बुलंदशहर, सहारनपुर, मथुरा और गाजियाबाद सीट शामिल है.

विंडबना यह है कि सपा के दांव से दबाव में आई कांग्रेस इस तरह बैकफुट पर थी कि अपने कई बड़े नेताओं के लिए भी गठबंधन में सीटें नहीं हासिल कर पाई। उत्तर प्रदेश में कुल 80 संसदीय सीटों में से 17 पर कांग्रेस और 62 पर सपा लड़ेगी। एक सीट भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को दी जा सकती है।यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि कांग्रेस अब इन 17 सीटों पर किन-किन नेताओं को चुनाव लड़ा सकती है, लेकिन इस चर्चा ने कुछ बड़े नेताओं को पीछे धकेल दिया है, क्योंकि उनके दावे वाली सीटें सपा के खाते में चली गई हैं और कांग्रेस काफी प्रयास के बाद भी उन सीटों के लिए सपा को राजी नहीं कर पाई।

सूत्रों के अनुसार, स्वयं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बलिया या घोसी सीट से लड़ना चाहते थे, क्योंकि वहां भूमिहार बिरादरी का अच्छा प्रभाव है। कांग्रेस की ओर से प्रस्ताव भी दिया गया, लेकिन सहयोगी दल के प्रदेश अध्यक्ष तक के लिए सपा सीट छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुई। इसी तरह फैजाबाद पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ। निर्मल खत्री, रामपुर पूर्व सांसद बेगम नूर बानो, लखनऊ पूर्व सांसद राज बब्बर और भदोही पूर्व सांसद राजेश मिश्रा के लिए मांग रही थी। इनमें से कोई भी सीट सपा ने कांग्रेस के खाते में नहीं दी।

राजेश मिश्रा ने एक्स पर पोस्ट कर लिख भी दिया कि पार्टी के प्रति समर्पण और नेतृत्व के प्रति निष्ठा पर चाटुकारिता भारी पड़ रही है। इससे बड़े नेताओं की नाराजगी का संकेत मिलता है। अब माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को अनिच्छा से वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरुद्ध लड़ना पड़ेगा। राज बब्बर को गाजियाबाद या फतेहपुर सीकरी से उतारा जा सकता है, लेकिन अन्य नेताओं के लिए सीट नजर नहीं आ रही है।

पार्टी पदाधिकारी मानते हैं कि प्रत्याशियों की तीन सूची जारी कर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कांग्रेस हाईकमान को इशारा कर दिया कि सपा अकेले चुनाव मैदान में जाने को तैयार है। इसी दबाव में कांग्रेस नेतृत्व समझौते को मजबूर दिखाई दिया।

बताया जाता है कि कांग्रेस जब प्रेशर में आई तो अखिलेश ने मध्य प्रदेश का दांव भी खेल दिया। मध्य प्रदेश चुनाव की खजुराहो सीट पर सपा चुनाव लड़ेगी। बाकी सीटों पर कांगेस के उम्मीदवारों का समर्थन किया जाएगा। इससे पहले सपा की तरफ से मध्य प्रदेश में  किसी सीट पर दावेदारी की चर्चा सामने नहीं आई थी। मध्य प्रदेश के खजुराहो सीट पर समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी मैदान में होगा। हालांकि सपा के लिए यहां चुनौती आसान नहीं है क्योंकि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने खजुराहो लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली सभी आठ विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। मध्य प्रदेश के सीमावर्ती उत्तर प्रदेश से सटी इस सीट पर सपा यहां से लोकसभा चुनाव में अच्छे परिणाम की आशा करेगी।

हालांकि, मध्य प्रदेश के सीमावर्ती उत्तर प्रदेश से सटी इस सीट पर सपा यहां से लोकसभा चुनाव में अच्छे परिणाम की आशा करेगी। छतरपुर कटनी और पन्ना से जुड़ाव रखने वाला खजुराहो लोकसभा क्षेत्र भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। जहां से भाजपा के नाम पर जो भी उम्मीदवार उतरा उसे जनता ने जीत के सिंहासन पर बिठाया। इस लोकसभा सीट पर 1999 के बाद से भाजपा का लगातार कब्जा चला आ रहा है।

2019 के लोकसभा चुनाव में मुरैना क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले डा विष्णु दत्त शर्मा (वीडी शर्मा) को भाजपा ने चुनावी मैदान में उतारा था। उनके सामने राजनगर राजघराने की महारानी कविता सिंह कांग्रेस से चुनावी मैदान में थी, कविता सिंह को करारी हार झेलनी पड़ी। वीडी शर्मा ने यह चुनाव करीब पांच लाख वोटों से जीता था। हालांकि खजुराहो लोकसभा सीट पर बाहरी चेहरों का कहीं न कहीं अंदरूनी विरोध होता रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों के रग रग में बसती चली गई भाजपा का जब उम्मीदवार चुनावी मैदान में होता है तब बाहरी चेहरों को भी पार्टी के नाम पर पूरा समर्थन मिलता है।

2019 के चुनाव का गणित अगर देखा जाए तो सपा और कांग्रेस के उम्मीवारों के वोटों से दोगुने वोट भाजपा के वीडी शर्मा को मिले थे। 2019 में सपा से चुनाव लड़ने वाले वीर सिंह पटेल को मात्र 40,077 वोट ही मिल पाए थे। भाजपा के वीडी शर्मा को 8 लाख 11 हजार 135 और कांग्रेस की कविता सिंह को 3 लाख 18 हजार 735 वोट मिल पाए। इसे देखकर कहा जा सकता है कि कांग्रेस और सपा एकजुट होकर भी चुनाव लड़ते हैं तो भी भाजपा मजबूत होगी। हालाकि यादव और पटेल समाज की संख्या इस लोकसभा क्षेत्र में बहुत है। सुना जाता है कि राजनगर राजघराने की महारानी कविता सिंह कांग्रेस से नाराज है क्योकि उसे उम्मीद थी कि वह इसी सीट से दोबारा चुनाव लड़ेगी ।ज्ञात हो कि पिछली बार वह दो नंबर पर रही थी और अब उसको ज्यादा उम्मीद थी ।

अशोक भाटिया,

वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार ,लेखक, समीक्षक  एवं टिप्पणीकार

लेखक  5  दशक से लेखन कार्य से जुड़े हुए हैं

पत्रकारिता में वसई गौरव अवार्ड से  सम्मानित,

वसई पूर्व  – 401208 ( मुंबई )

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