गौ तस्करों के विरुद्ध शिकायत करने चपोरी, धेमाजी गए पशु प्रेमियों को एडीजीपी ने उल्टा गिरफ्तार करने की धमकी दी

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गौ तस्करों के विरुद्ध शिकायत करने चपोरी, धेमाजी गए पशु प्रेमियों को एडीजीपी ने उल्टा गिरफ्तार करने की धमकी दी

धेमाजी: आसाम अवैध पशु तस्करी के कारोबार के चलते हमेशा से गोवंशों के लिये सम्वेदनशील क्षेत्र रहा है। आसाम-बांग्लादेश की अनिश्चित सीमा के चलते तस्कर आसानी से अधिकारियों की नाक के नीचे से पशु तस्करी करते हैं। इतना ही नहीं, आसाम की आन्तरिक सीमा में भी बहुत सारे क्षेत्र अवैध पशु तस्करी और कसाई खाने के लिये बदनाम हैं। यह सभी आसाम मवेशी संरक्षण विधेयक-1950, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1950, पशु यातायात नियम, केंद्रीय मोटर वाहन नियम 2015 का खुले आम उल्लंघन है।

विभिन्न अवसरों पर पशु प्रेमी कार्यकर्ताओं ने उक्त विषय का उल्लेख सम्बंधित अधिकारियों से भी किया है। विभिन्न कसाई खानों, अवैध पशु घरों आदि के खिलाफ असंख्य सबूतों के साथ शिकायत भी दर्ज कराई है। लेकिन फिर भी आसाम में अवैध तस्करी का काम खुले आम चल रहा है जिसमें कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत भी शामिल है। 21 मार्च 2021 को चपोरी थाना स्टेशन की घटना इस बात का सबूत है।

21 मार्च 21 को, प्रात: तकरीबन 11.15-11.45 के बीच पशु प्रेमी कार्यकर्ताओं को सेमन चपोरी पशु बाज़ार से गौवंशों से ठूंसे वाहन जाते दिखे। यह वाहन तब तक बाज़ार में खड़े रहते, जब तक कि ये ठूंस-ठूंस कर भर ना दिए जाएं। पशु बाज़ार में पशुओं के लिये चारे, पानी, दवाई, चिकित्सक आदि का भी इन्तजाम नहीं था। मौके पर कोई सरकारी पशु चिकित्सक भी उप्लब्ध नहीं था। स्थानीय लोगों के अनुसार सेमन चपोरी बाज़ार अरुणाचल में चल रहे अवैध कसाईखाने का सबसे बड़ा आपूर्तिकारक है। इसी क्षेत्र से नागोन- गौहाटी-मेघालय मार्ग से गौवंशों को अवैध तरीके से बांग्लादेश पहुंचाया जाता है।

पशु कल्याण कार्यकर्ताओं इस अपराध की सूचना पुलिस अधीक्षक धेमाजी को दी। उन्होनें ओ.सी को तुरंत कार्यवाई करने का आदेश दिया और कार्यकर्ताओं को थाने पहुंचने का निर्देश दिया। ओसी महिला कार्यकर्ताओं को लेकर पशु बाज़ार पहुंचे और पुलिस की मौजूदगी में ही मवेशियों से ठूंसे वाहन जाने लगे। वहाँ करीब 250 मवेशी तथा 5 बड़े ट्रक ले जाये जाने के लिए तैयार खड़े थे। कुछ ही पलों में 30-40 लोगों की भीड़ ने टीम को घेर लिया तथा डराने धमकाने लगे।

पुलिस अधीक्षक की सलाह पर महिला कार्यकर्ता पुलिस थाने वापस लौट आईं। 15 मिनट के अंदर ही 100 से ज्यादा बदमाशों की भीड़ ने थाने पर धावा बोल दिआ। थाने का गेट तोड़ने के साथ ही वह पत्थरबाजी भी कर रहे थे। वह नारे लगाते हुए चिल्ला रहे थे। देखने में वे बांग्लादेशी लग रहे थे तथा भाषा भी बंग्लादेशी ही बोल रहे थे। इतने में मार्किट कमेटी के सदस्य भी थाने पहुंच कर महिला कार्यकर्ताओं पर केस वापस लेने का दबाव बनाने लगे। इसके बाद एसडी वीओ थाने में आया। उसने बिना जांच किए ही, एक ट्रक में 23 मवेशियों को यातायात हेतु योग्य का सर्टिफ़िकेट दे दिया।

अचानक एडीजीपी श्री जीपी सिंह भी थाने पहुंचे और महिला कार्यकर्ताओं पर नियम और कानून तोड़ने का आरोप लगा,जोर जोर से चीखने लगे। कहने लगे ये चुनाव का समय है, ऐसे वक़्त में इस तरह के अपराध करने में कुछ गलत नहीं। हो सकता है उन्के पास चुनाव से माह भर पहले किए जा सकने वाले अपराधों की लिस्ट तैयार हो। यहां यह सीबीआई जान्च का विषय है की स्थानीय पुलिस 100 गुंडों से डर गई या वजह कुछ और है।

महिला कार्यकर्ता ने एडीजीपी से पूछा कि किस प्रकार वह कानून व्यवस्था को भंग कर रही है। वह तो सिर्फ शिकायत करने आई हैं जबकी दूसरी पार्टी चीख-चिल्लाकर कर थाने पर पत्थर बरसा रही है। एडिजीपी ने महिला कार्यकर्ताओं की मदद करने के बजाय, उल्टा उन पर ही गुण्डागर्दी की रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया।
यहां उल्लेखनीय है कि मै.मिलिजुली एंटरप्राइज कंपनी जो यहां इन मवेशीयों के यातायात का काम कर रही है हाई कोर्ट में एक रिट (WP(C)3503/2020) दायर कर चुकी है। जिसमें उसने माननीय हाई कोर्ट से नियम विरुद्ध मवेशियों की अवैध तस्करी ओर यातायात की अनुमति मांगी थी। इस ट्रांसपोर्टर का इस थाने में आना-जाना लगा रहता है ताकि पुलिस बिना किसी रुकावट के उसके ट्रकों को आवाजाही करने दे। ऐसे प्रतीत होता है कि इस अवैध आवाजाही में ओसी का पूरा सहयोग है।
तस्करों और पत्थरबाजों के खिलाफ अभी तक कोई भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। कार्यकर्ता की शिकायत भी नहीं लिखी गई। मवेशियों की बरामदगी पर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। उल्टा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तारी का डर दिखा, शिकायत वापस लेने और पुलिस थाने से चले जाने का दबाव बनाया गया।

कार्यकर्ताओं को वापस लौटते समय 2 किमी तक सड़क के दोनों ओर तस्कर खड़े मिले, जो कार्यकर्ताओं को देख धमकाने की मुद्रा बना रहे थे। बाजार से सारे मवेशी हटा लिये गये थे। सभी मवेशियों से भरे ट्रक अपने गंतव्य की ओर निकल चुके थे। यह घटना गम्भीर प्रशन उठाती है कि अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही क्यूँ नहीं हुई और पुलिस के पास कानून का पालन करवाने को पहुंची महिला कार्यकर्ताओं को दबाया क्यूँ गया? और सभी मवेशियों और ट्रकों को भगाया क्यूँ गया?

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