चुनाव मुद्दों एवं नारों से जीतें, फिसलती जबान पर संयम जरूरी

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चुनाव मुद्दों एवं नारों से जीतें, फिसलती जबान पर संयम जरूरी

भारत देश में हर महीने चुनाव होता है क्योंकि केंद्र सरकार के अलावा आढाई दर्जन राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में अलग अलग समय में चुनाव इसलिए होतें है कि राजनीतिक कारणों एवं बेमेल गठबंधन के अलावा अन्य कारणों से सरकार गिर जाती है अथवा गिरादी जाती है जिसके कारण चुनाव आयोग को हमेशा सतर्क रहकर चुनाव कराने पङते है जिससे देश का पैसा पानी की तरह बहता है तथा स्थानीय प्रशासन चुनाव में लग जाने से विकास ठप्प हो जाता है. निष्पक्ष एवं स्वस्थ चुनाव करवाने के लिए नये नये प्रयोग होने तथा अलग अलग राज्यों के प्रवेक्षक आने तथा बाहर से अतिरिक्त सुरक्षा बलों के आने से काफी महंगा पङता है फिर भी लोकतंत्र के लिए यह आवश्यक है.

चुनाव के समय मनोरंजन के लिए अभिनेता ,गायक तथा कामेडियन बुलाकर राजनीतिक दल भीड़ तो जुटाने में कामयाब जरूर होते हैं लेकिन उनके आने से वोट नहीं मिलते. नारों का महत्व आजादी के बाद काफी लोकप्रिय रहा जिसका प्रभाव जनता पर काफी अच्छा पङता है लेकिन कई बार उल्टा पङ जाता है जैसे भाजपा का हर हर मोदी घर घर मोदी, बहुजन पार्टी का तिलक तराजू ओर तलवार इनको मारो जुते चार आदि नारों से जहाँ लोग प्रभावित होते हैं वहीं नाराज भी हो जाते हैं.

आजादी के बाद ढोल नगाड़े बजाते गाने गाते हुए पार्टी के लोग प्रचार करते थे वहीं महिलाओं द्वारा गीत गाते गाते मतदान करते जाते देखा जाता था लेकिन साधन तकनीक एवं धन बढने से चुनावों की रुप रेखा बदल गयी.

राजनीति में शाम दाम दंड भेद का इस्तेमाल करना कोई नयी प्रथा नहीं है लेकिन भाषा पर संयम बहुत अहम है जरूरी नहीं है कि व्यक्तिगत आक्षेप लगाना, लोगों को झूठ बोलकर संगमरमरी लच्छेदार वादे करना् आदि कोई महत्व नहीं रखता.

अब जनता अधिकांश शिक्षित हो चूकी है तथा राजनीति को भी समझने लगी है इसलिए औच्छी राजनीति करने वाले दलों एवं नेताओं को मतदान के समय सबक सिखाने के लिए तैयार है.

मोदी सरकार ने परंपरा गत राजनीति से हटकर सबका साथ सबका विकास के रास्ते पर चलकर सबका विश्वास भी जीतने में महारत हासिल की है चाहे तो हर दल इस प्रकार उदाहरण पेश कर सकते हैं लोग काम का दाम देने के लिए तैयार है लेकिन दिग्भ्रमित करने वाले बयानों तथा अनावश्यक बकवास से उब चूके है .

फिलहाल पांच राज्यों में चुनाव प्रक्रिया जारी है वही कोराना महामारी का प्रकोप बढ रहा है ऐसे में चुनाव आयोग के सामने चुनौती है तो हर मतदाता के लिए मतदान करने के साथ सावधानी बरतने की भी आवश्यकता है. जहाँ सुरक्षा हटी वही दूर्घटना घटी.

मदन सिंघल पत्रकार एवं साहित्यकार, शिलचर असम मोबाइल 9435073653

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