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पत्रकार और समाजसेवी दिलीप कुमार का ऐलान : करीमगंज लोकसभा से लड़ेंगे निर्दल

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बराकघाटी से भेदभाव पर भाजपा और विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया

प्रे.सं. हाइलाकांदी, ६ मार्च : प्रधानमंत्री मोदी जी के नाम पर टिकट लेकर जीतते हैं और पांच साल बैठे-बैठे बिता देते हैं, ऐसी बीजेपी से हमें आपत्ति है। हमलोग भाजपा के समर्थक ही है किन्तु आज की भारतीय जनता पार्टी को पुरानी कांग्रेस पार्टी ने हाईजेक कर लिया है। जैसे तैसे पार्टी को मनमाना ढंग से चला रहे हैं। पुराने बीजेपी के कार्यकर्ताओं का कोई गुरुत्व नहीं है। हमारे साथ पुराने लोगों का समर्थन है। एक व्यक्ति का वर्चस्व है जो मनमाने ढंग से टिकट दे रहे हैं, मोदी के नाम का पतवार तो है ही। उपरोक्त बातें बराकघाटी के समाजसेवी तथा पत्रकार दिलीप कुमार आज हैलाकांदी एक पत्रकार वार्ता के जरिए पत्रकारों से कही। दिलीप कुमार ने बताया कि पिछले सन् २०१९ में लोकसभा चुनाव में जब मैं उम्मीदवार बनना चाहता था तब तत्कालीन सीएम तथा और लोगों ने हमारी सभी मांगे मानने के शर्त पर मुझे बैठने का पुरजोर दबाव दिया, और मैं उनलोगों की बातों में भी आ गया। किन्तु आज पांच वर्ष बीत गये उनका वादा वादा ही रहा। इतना ही नहीं देश में स्वतंत्रता संग्राम का पहला आवाज उठाने वाले शहीद मंगल पाण्डेय की मूर्ति लगाने में भी कोरा आश्वासन ही मिला। कई साल से हम मूर्ति लगाने के लिए सरकार से अपील पर अपील कर रहे हैं किन्तु कोई सुनवाई नहीं।

डीलिमिटेशन के नामपर करीमगंज हाइलकांदी का दो सीट घटा दिया गया, जबकि जनसंख्या दिनोंदिन बढ़ता जा रही है, इसका मुझे प्रतिवाद है। डलु चाय बागान को निर्ममता से उजाड़ दिया गया। हिन्दीभाषी शिक्षकों की कई सालों से नियुक्ति नहीं हो रही है। इतना ही नहीं असम में हिन्दी को समाप्त करने का सरकार ने रिजोल्युशन लिया है। इसके विरुद्ध हमने २१ संगठनों के साथ मिलकर निंदा प्रस्ताव भी लिया था। उन्होंने बताया कि बराकघाटी के स्थानीय लोगों को तीसरी और चतुर्थ श्रेणी की भी नौकरी नहीं मिल रही है, बाहरी लोगों को नौकरी दी जा रही है। चाय बागान की जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है, उसपर भी कोई कार्रवाई नहीं।

समाजसेवी दिलीप कुमार ने आगे बताया कि हमारी मांगों को मुख्यमंत्री ने पूरा करना तो दूर, हमलोगों से मिले तक नहीं। इन सभी बातों को गहराई से मंथन करने के पश्चात मैंने करीमगंज विधानसभा से निर्दल प्रत्याशी के रुप में प्रतिद्वंद्विता करने का निर्णय लिया है। यहाँ की कांग्रेस और यूडीएफ पार्टी किसी न किसी के पॉकेट में है, इसको बोट देना व्यर्थ ही जाएगा। सब दलों में दल-दल है, सबसे अच्छा निर्दल है।

पत्रकार वार्ता में मंच पर उपस्थित समाजसेवी रुपनारायण राय ने वर्तमान सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कुछ प्रश्न दागे जैसे- 2019 में हिमन्त विश्वशर्मा ने बहुत सारा आश्वासन दिया किन्तु कुछ नहीं किया।, शहीद मंगल पाण्डेय मूर्ति स्थापना की अनुमति नहीं दे रहे । हिन्दी को असम से समाप्त करने का प्रयास, अगस्त का रिजोलुशन, 21 संगठनों की बैठक शिक्षा मंत्री का कोरा आश्वासन, २१ फरवरी को प्रतिनिधिमंडल के साथ पूर्व निर्धारित बैठक रद्द और अगले का झूठा आश्वासन, हिन्दी शिक्षकों की नियुक्ति बंद, बाकी हो गयी। हिन्दी पुस्तकें नहीं दी जा रहीं।, करीमगंज को डेलीमिटेशन में ८ सीट से ६ सीट किया और जनरल कर दिया, जिससे हिन्दू का नुकसान।, चाय जनगोष्ठी के मांग पर कोई कारवाई नहीं । चाय बागान क्षेत्रों में सड़क, मोबाइल सिग्नल, पानी आदि समस्याएँ पूर्ववत। हमारे लोगों को भाजपा में कोई जगह नहीं केवल वोट बैंक के रुप में प्रयोग किया जाता है।, जाति प्रमाण पत्र की समस्या की कोई सुनवाई नहीं। चाय जनगोष्ठी के लोगों को नौकरी में कोई जगह नहीं, सब असमिया लोगों को नौकरी, मातृ‌भाषा माध्यम से शिक्षा होनी चाहिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार जबकि हमलोगों की मातृभाषा ही बदल दी जा रही है। एम आई एल बांग्ला लेने को बाध्य हैं, चाय जनगोष्ठी TGL के लिए पहले सीट निर्धारित था, उसे खत्म करके ३% किया गया, वो भी नहीं मिल रहा। रुपनारायणजी ने कहा कि मोदीजी का नारा सबका साथ-सबका विकास’ बराकघाटी में लागू नहीं हो रहा। सरकार को हमारी परवाह भी नहीं।

पत्रकारवार्ता में उपस्थित महिला संगठन की प्रतिनिधि शची कुमारी दुबे ने कहा कि मैं अपने संगठन तथा महिलाओं के तरफ से दिलीप जी का पूर्ण समर्थन करती हूँ। इसके पीछे कारण यह है कि मैंने यहाँ पर जन्म तो लिया है परन्तु दिलीप जी ने यहाँ के गांव-गांव, चप्पे-चप्पे को जानते है और यहाँ के लोगों के कल्याण हेतु अपने जीवन का बहुमूल्य समय न्यौछावर कर दिया। दिलीप भैया मोदी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि मोदीजी के समर्थन में उनके खिलाफ खड़े हैं। हमें एक अच्छा कर्मठ प्रत्याशी की जरुरत है, जो हमें इनसे बेहतर कोई नहीं दिखाई देता।

पत्रकारवार्ता में मंचासीन अतिथियों में रामनारायण नुनिया, राजकुमार भर, मनोज रुद्रपाल, सत्यनारायण नुनिया, राजु केवट, बाबुल तांती तथा अन्य वरिष्ठ लोगों में समाजसेवी दिलीप बरई, सत्यनारायण तेली, जयप्रकाश गुप्ता तथा रितेश नुनिया, अमल ठाकुर उपस्थित थे।

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