पूरे बराक घाटी में त्राहि-त्राहि, सभी नदियों का जलस्तर खतरे के ऊपर, यातायात व्यवस्था भंग, लाखों की संख्या में लोग बाढ़ के पानी से घिरे

शिलचर में 6-7 फूट से लेकर 9-10 फुट तक पानी, अभी भी नगरीय इलाके में बढ़ रहा जल, आतंकित नगरवासी काछार, करीमगंज, हाइलाकांदी तीनों जिलों में हाहाकार विमान से लाया गया पहली बार शिलचर में डीजल- पेट्रोल

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पूरे बराक घाटी में त्राहि-त्राहि, सभी नदियों का जलस्तर खतरे के ऊपर, यातायात व्यवस्था भंग, लाखों की संख्या में लोग बाढ़ के पानी से घिरे

काछार, करीमगंज, हाइलाकांदी तीनों जिलों में हाहाकार
विमान से लाया गया पहली बार शिलचर में डीजल- पेट्रोल
मुख्यमंत्री ने प्रशासन को अधिक सतर्क रहने का दिया निर्देश, बाढ़ पीड़ितों को पूरी सहायता पहुंचाने का आदेश

शिलचर में 6-7 फूट से लेकर 9-10 फुट तक पानी, अभी भी नगरीय इलाके में बढ़ रहा जल, आतंकित नगरवासी जिलाधिकारी ने लोगों से सहायता के लिए आगे आने का किया अनुरोध

प्रेरणा भारती के प्रेस में भी घुस गया पानी, प्रिंटिंग मैटेरियल नष्ट होने का खतरा

शिलचर, विशेष प्रतिनिधि द्वारा 21 जून: 19 जून को शायंकाल खबर आई की कुछ असामाजिक तत्वों ने बेतुकांदी बांध काट दिया है और बड़ी तेजी से पानी सिलचर के इलाके में घुसना शुरू हो गया है। तब किसी ने यह कल्पना नहीं किया कि 24 घंटा बीतते ना बीतते पूरा शिलचर बराक नदी के आगोश में समा जाएगा। पहले बेरंगा, मधुरबंद, कनकपुर एरिया में पानी भरा, फिर फाटक बाजार, बिलपार, पब्लिक हाई स्कूल रोड, गोपाल अखाड़ा रोड, रंगिरखारी, शरत पल्ली, सोनाई रोड, हाइलाकांदी रोड, न्यू शिलचर एरिया के फर्स्ट लिंक रोड, दास कॉलोनी, नेशनल हाईवे, सेकंड लिंक रोड, थर्ड लिंक रोड नागाटीला आदि एरिया में 20 जून को शाम होते होते पूरा डूब गया। इटखोला, मालुग्राम, तारापुर, शिवबाड़ी रोड, विवेकानंद रोड, मालिनी बिल, सुभाष नगर, अंबिकापट्टी, हॉस्पिटल रोड, प्रेमतला, नाजीरपट्टी, गोपालगंज, एनएन दत्ता रोड, शिलांग पट्टी, रंगपुर, कराती ग्राम आदि एरिया में भी पानी भरा हुआ है। ग्रामीण इलाके पहले से ही डूबे हुए हैं।

जिलाधिकारी श्रीमती कीर्ति जाली ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से लोगों से घर से बाहर ना निकलने और सामर्थ्यवान लोगों से बाढ़ में फंसे लोगों की मदद करने का अनुरोध किया। जिला प्रशासन ने एसडीआरएफ, सीआरपीएफ, बीएसएफ के जवानों को विभिन्न इलाके में बाढ़ के पानी में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगा दिया। घर घर से बीमारों को, बुजुर्गों को, महिलाओं को, बच्चों को निकालने का काम जारी है। कई इलाके में इतना पानी हो गया की चाह कर भी लोग घर से निकल नहीं पा रहे थे। कहीं कमर तक जल, कहीं डूबने भर। बड़ी संख्या में अभी भी लोग ऐसे स्थानों में फंसे हुए हैं, जहां से निकलने का कोई उपाय नहीं है। हर साल बाढ़ आने पर जिन स्कूलों में लोग शरण लेते थे, वह स्कूल भी डूबे हुए हैं। लोगों को कहते सुना गया की 1985- 86 के फ्लड में भी इतना पानी नहीं हुआ। शिलचर शहर एक प्रकार से पूरे देश से कट गया। शिलचर -गुवाहाटी रोड पर पानी, शिलचर-आइजल रोड पर पानी, शिलचर- जिरिबाम रोड पर, पानी हाफलांग से पहले से कटा हुआ शिलचर बराक नदी के पानी में पूरी तरह से घिर चुका है। सोनाबाड़ीघाट की तरफ से और अन्नपूर्णा घाट की तरफ से भी नदी का पानी ओवरफ्लो करके शहर में घुस रहा है। कुछ-कुछ इलाके में जो स्थान ऊंचाई पर है, जैसे जीसी कॉलेज, जेल रोड, सर्किट हाउस, मेहरपुर आदि बचा हुआ है। रेलवे स्टेशन और आसपास के क्वार्टर में पानी भर जाने के कारण रेल विभाग के लोगों ने स्टेशन पर खड़े ट्रेन के डिब्बों में शरण ले रखी है।

शाम होते होते कटहल रोड इलाके में भी पानी भरना शुरू हो गया। कटहल रोड, चंद्रपुर, भकतपुर का विशाल इलाका रात भर में डूब गया। अभी भी कटहल रोड के ऊपर से पानी बह रहा है और बढ़ रहा है। सुबह होते होते प्रेरणा भारती कार्यालय और प्रिंटिंग प्रेस जो सड़क से कम से कम 6 फीट ऊंचा है, उसमें भी पानी घुस गया। प्रेरणा भारती का ट्रांसफार्मर जिसके नीचे मीटर लगा हुआ था वह भी पानी में डूब गया। प्रेरणा भारती के प्रिंटिंग प्रेस में चारों ओर पानी भर रहा है। पूरे शिलचर में विद्युत व्यवस्था भंग हो चुकी है। केवल मेडिकल कॉलेज में विद्युत आपूर्ति जारी है। आज से प्रेरणा भारती का काम अन्यत्र करने की व्यवस्था की जा रही है।

जैसे जैसे समय बीत रहा है, पानी का बढ़ना भी जारी है। जो इलाके बाकी है, अब उनकी तरफ पानी बढ़ रहा है। बराक नदी का जलस्तर खतरे की सीमा से 177 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है। लगभग बराक नदी और शिलचर एकाकार हो चुके हैं। सड़क नजर नहीं आ रही हैं, चारों तरफ इलेक्ट्रॉनिक बोट और हस्त निर्मित छोटी-छोटी नौकाएं चल रही है। यातायात व्यवस्था भंग हो जाने से, घर से निकल कर लोगों का कहीं इधर-उधर जाना भी मुश्किल हो गया है। हालांकि बहुत सारे लोग सोमवार को ही घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों के लिए निकल गए। अब उनकी चिंता यह है की यदि पूरा घर डूब गया तो उसमें रखा हुआ सामान, कागज पत्र आदि नष्ट हो जाएगा।

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