बंगला भाषियों के लिए ना तो सरकार में ना ही राजनीतिक दलों में सहानुभूति -गौतम दता

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बंगला भाषियों के लिए ना तो सरकार में ना ही राजनीतिक दलों में सहानुभूति -गौतम दता

ऐन विधानसभा चुनाव के समय बराक उपत्यका बंग साहित्य एवं सांस्कृतिक सम्मेलन ने बंग भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस किया.केंद्रीय समिति के महासचिव गौतम प्रसाद दता ने दुख व्यक्त किया कि बंगला भाषियों को टारगेट बनाकर भाषा नागरिकता जमीन एवं नियुक्ति में उपेक्षित किया जाता है जबकि असम में तीस से अधिक प्रतिशत जनसंख्या यानि 90 हजार है. शंकरदेव सांस्कृतिक संस्था द्वारा भी सम्मेलन को राज्य सरकार द्वारा आवंटित राशि नहीं दी गई.

असम में एक लाख आठ हजार अयोग्य मतदाताओं में 80℅ बंगाली है. विभिन्न डिटेंसन कैंप में 988 लोगों में भी अधिकतर बंगाली ही है. असम सरकार सहित सभी राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए बराकघाटी का कोई मुद्दा नहीं उठाते. सिर्फ कामलाक्ष्य पुरकायस्थ विधानसभा में एक बार मुद्दा उठाया जो लिपापोती करके खत्म कर दिया गया.एन आरसी के नाम पर कोई नीति नहीं है. कोई सरकार आये असम में सोचनीय अवस्था ही रहेगी.हर क्षेत्र में वंचित रखा गया है.

नितिश भट्टाचार्य पुर्व अध्यक्ष सौरेंद्र कुमार भट्टाचार्य वरिष्ठ पत्रकार तथा पुर्व अध्यक्ष तैमूर राजा चौधरी तथा संस्था के विभिन्न पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया.

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