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बिष्णुप्रिया मणिपुरी, हिंदी और डीमासा भाषाओं को बराक घाटी की सहायक आधिकारिक भाषा और शिक्षा का माध्यम घोषित करने की मांग

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प्रे.सं शिलचर 3 अप्रैल। भारतीय लोकसभा चुनावों से पहले, भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा असम के मुख्य सचिव श्रीपवन कुमार बरठाकुर को केवल पंद्रह दिनों के भीतर (12 मार्च और 28 मार्च) दो सिफारिशें की गईं यह एक विशेष संदेश देता है। बुधवार को काछार जिले के जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, शिक्षा मंत्री और सांस्कृतिक परिक्रमा मंत्री, असम के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधान सभा अध्यक्ष, शिक्षा मंत्री, सांस्कृतिक परिक्रमा मंत्री और वित्त मंत्री के माध्यम से सयुक्त ज्ञापन प्रदान किया गया। संयुक्त ज्ञापन पर हस्ताक्षर करनेवालों में श्रीकृष्ण रुक्मिणी कलाक्षेत्र के सभापति बिधान सिंह, बराक घाटी तेली साहू समाज के अध्यक्ष मनोज कुमार साह, अखिल असम भोजपुरी परिषद के अध्यक्ष जुगल किशोर त्रिपाठी और उपाध्यक्ष वीणापाणि मिश्रा, बिष्णुप्रिया मणिपुरी साहित्य अकादमी असम राज्य समिति के अध्यक्ष आनंद मोहन सिंह, बराक हिंदी साहित्य समिति के संपादक दुर्गेश कुर्मी और सह-संपादक अपर्णा तिवारी, ब्रह्मज्योति महिला मंच की नेत्री किरण त्रिपाठी और डीमासा छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कुंतल बर्मन सहित अन्य लोग शामिल थे। ज्ञात हो कि इसी वर्ष तीन मार्च को श्रीकृष्ण रुक्मिणी कलाक्षेत्र प्रबंधन द्वारा आयोजित टॉक शो के मुख्य वक्ता बिधान सिंह ने केंद्र व राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए अनुरोध किया था कि आरंभ में बराक घाटी के कछार, करीमगंज और हैलाकांदी जिलों में बिष्णुप्रिया मणिपुरी, डीमासा और हिंदी को  राष्ट्रीय शिक्षा नीति और जिनेवा सम्मेलनों के तहत आधिकारिक भाषा और शिक्षा के माध्यम के रूप में मान्यता देनी चाहिए। वार्ता में हरिकांत सिंह व नीलमाधव सिंह उपस्थित थे। ज्ञापन देते हुए प्रतिनिधिमंडल में बिधान सिंह, जुगल किशोर त्रिपाठी, वीणापाणि मिश्रा एवं अपर्णा तिवारी।

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