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भिखारी ठाकुर प लिखाइल पहिला किताब 

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[ इ किताब भिखारी ठाकुर जी के जिअता में ही लिखाइल रहे आ किताब के लेखक एह किताब के लिखे से पहिले, क हाली भिखारी ठाकुर जी से मिल चुकल रहनी । ]
किताब के नाव –  भिखारी ठाकुर
किताब के लेखक – महेश्वर प्रसाद ( महेश्वराचार्य )
किताब के प्रकाशन वर्ष – 1964
निःसंदेह भोजपुरी समाज भा अउरी समाज में जातिगत विषमता बा आ जातिगत विषमता के वजह से बोल-चाल से ले के बात-व्यवहार तक असर परल बा ।  हम सुनले बानी कि कवनो चौबे जी कुछ अंड-बंड भिखारी ठाकुर के बारे में कहले रहले ।  संभव बा ठकुरसोहाती आ सामंतवाद के चरम वातावरण में भिखारी ठाकुर के कुछ सामंती सोच वाला लो अरे-तरे कइले होखे ।  क हाली समाज प्रसिद्धि से जरेला आ ओह घरी ओकर सामंती सोच उखड़ के चल आवेला ।  मेहरारुन के दुरदसा नाटक खातिर  राहुल सांकृत्यायन के, सामंती सोच वाला लो का ना कहल जबकि राहुल जी के जाति का रहे इ मय लो जानत बा ।  खैर आज हम कुछ चीजन प रउवा सभ के ध्यान दियावल चाहत बानी ।
महेश्वर प्रसाद , भिखारी ठाकुर प 1931 से लिखत रहले , एह किताब में उ खुद कहि रहल बा‌डे कि ‘ सरस्वती , माधुरी , आ आर्य महिला नाव से सुप्रसिद्ध पत्रिका में 1944 ले अनेकन गो लेख लिख चुकल रहनी ।  बाकिर एह लेख खातिर प्रोत्साहित करे वाला रहले गणेश चौबे आ प्रो. रामेश्वर नाथ तिवारी ।
एह किताब के छपे खातिर 1950 में ‘ चांद ‘ प्रकाशक , एन सहगल के देहनी बाकिर जब 1962 ले किताब ना छपल महेश्वराचार्य जी एह किताब के वापस ले के , पटना भोजपुरी परिवार के देहनी , जवन नर्मदेश्वर सहाय जी के देख-रेख में चलत रहे ।  एह किताब के प्रकाशन में अंजोर के सह-सम्पादक अविनाश चंद्र विद्यार्थी जी के बहुत बड़ सहयोग रहे । शिवपुजन सहाय जी के आशिर्वाद मिलल आ डा. भुवनेश्वर नाथ मिश्र ‘ राष्ट्रभाषा परिषद ‘ के ओर से किताब के प्रकाशन खातिर धन मिलल ।  रामरुप सिंह जी के समय-समय प सहजोग मिलल एह किताब के प्रकाशन में ।  भुमिका परमेश्वरी लाल गुप्त जी लिखले बानी ।
महेश्वराचार्य जी लिखत बानी , भिखारी ठाकुर के कृतियन प जब आलोचना लिख के उ सरस्वती के सम्पादक प. उमेशचंद्र मिश्र के भेजसु त उनुका भिखारी के गीत बहुत पसन परत रहे आ तुरंत सरस्वती में प्रकाशित हो जात रहे ।
भिखारी ठाकुर के अनगढ हीरा राहुल सांकृत्यायन जी कहनी , भोजपुरी के शेक्सपियर मनोरंजन प्रसाद सिंह जी कहनी , जनकवि , उदय नारायण तिवारी जी कहनी , पटना में सुप्रसिद्ध आयोजन जगदीश चंद्र माथुर जी करवनी , कृष्णदेव उपाध्याय से ले के केदारनाथ सिंह जी तक मय लोगन के कलम भिखारी ठाकुर खातिर चलल ।
एह किताब के पढत घरी डा. परमेश्वरी लाल गुप्त जी के लिखल भुमिका जरुर पढीं , महेश्वराचार्य जी के ‘ भूलल अछरिया जोरले जइहs ‘ जरुर पढी काहें कि एजुगे , भिखारी ठाकुर के उपर महेश्वराचार्य जी के दुसरका किताब के बुनियाद धराइल रहे ।
असल में भोजपुरी के भक्ति आ धार्मिक रुप के वाकई में मुल्यांकन एहि किताब में भइल बा । राम , कृष्ण , द्रौपदी , गंगा आदि से जुड़ल नाटक आ भिखारी के लगभग मय नाटकन में सुमिरन आ सुमिरन के बाद के नितिगत उपदेश भिखारी ठाकुर के भक्ति भाव के देखावेला जवना ओरि बहुत कम साहित्यकार लो लिखले बा ।  सबाल्टन के ढोंग करे वाला त एह ओर तिकवलहीं नइखे लिखे के बात त दुर के बा ।
त भिखारी ठाकुर प लिखाइल पहिला किताब ‘ भिखारी ठाकुर ‘ पढी साहित्यांगन प आ साहित्यांगन के धन्यवाद दिहीं एह अदभुत काम खातिर ।
आ सुनीं, भिखारी ठाकुर प दुसर्कियो किताब इहें के यानि महेश्वराचार्य जी लिखले रहनी आ उहो किताब भोजपुरी साहित्यांगन प बड़ुवे । फिलहाल पहिला किताब के पढीं जवना के लिंक नीचे दिहल बा –
– नबीन कुमार

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