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आगे बढो जोर से बोलो ! जन्म भूमि का ताला खोलो- (3)— आनंद शास्त्री

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सम्माननीय मित्रों ! स्मृतियों का अपना स्वतंत्र संसार होता है ! वे दिन कदाचित् समूचे भारतीय धर्मप्राण हिन्दुओं के लिये दूसरा मुगल काल था ! आज लोग कुछ भी कहें किन्तु उन दिनों उत्तर प्रदेश,गुजरात और महाराष्ट्र को सर्वाधिक बुरे दिनों से गुजरना पडा था ! मैं आश्रम में था ! किन्तु नाम मात्र को,कभी कहीं कभी कहीं आते जाते बुरी तरह से मानसिक तनाव होता था ! गुजरात की कांग्रेसी सरकार के दमनकारी कानूनों से सभी तृष्त थे ! पुलिस प्रशासन नित्य प्रति किसी न किसी कार्यकर्ता को पकड़ कर ले जाती ! मारती पीटती ! पैसे लेती ! घरवालों को भी प्रताड़ित करती ! गांव के लोग मुझे अजीब सी नजरों से देखते ! जैसे मैं-“एक निरपराध घोषित दुर्दांत अपराधी हूँ।
मुझे स्मरण है उन्हीं दिनों गुजरात के पंचमहाल जिले में दो रामभक्तों को पुलिस रात इसलिए उठा ले गयी क्यूँ कि उनके यहाँ अखण्ड रामायण हो रही थी ! चौथे दिन किसी दूसरी तहसील में उनके गोलियों से बिंधे शव मिले ! जिनपर अमानवीय अत्याचार के दर्जनों निशान थे किन्तु उनका पोस्टमार्टम भी नहीं हुवा और प्रशासन ने उनको चार दिन पूर्व ही भगोडे डाकू घोषित कर दिया था। वे दोनों हमारे यहाँ आते जाते थे ! विश्व हिन्दू परिषद के सदस्य होने के साथ-साथ वे श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समीति के पंचमहाल जिले के कार्यकर्ता थे।
मित्रों ! यही वह समय था जब हमलोग हांथ ठेले पर एक कारावास में रामलला की मूर्ति का प्रतीक रखकर गांव गांव-नग’र-नगर यात्रा करते थे ! छोटी छोटी नुक्कड़ सभायें होतीं जिनमें जन्म भूमि के इतिहास के साथ-साथ इस आंदोलन पर प्रकाश डालते हुवे हमलोग उद्घोष करते थे कि-“धिक्-धिक् हैं हिन्दू सन्तान ! ताले है जन्म स्थान !” आगे बढो जोर से बोलो ! जन्म भूमि का ताला खोलो” ! मुझे गर्व है कि उस आन्दोलन का मैं अति-सक्रीय सदस्य था ।
मुझे वे स्मृतियाँ झकझोरती रहती हैं कि उन दिनो इन्डियन नेशनल कांग्रेस के माधव सिंह सोलंकी एवं अमर सिंह चौधरी के मध्य दिल्ली दरबार में अपने आपको श्रेष्ठ दिखाने की होड चल रही थी ! यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि गुजरात की राजनीति- “चौधरी,पटेल एवं ठाकुरों”के आसपास घुमती रहती है ! इन दोनों व्यक्तित्वों के हाथों सत्ता आती जाती रहती और ये तब अपने आपको तीसमारखां सिद्ध करने हेतु संघ,बीजेपी एवं विश्व हिन्दू परिषद पर अत्याचार की सभी सीमायें लांघने को सदैव तत्पर रहते थे ! उनकी करतूतों को सुनकर शैतान भी कांपता होगा ! और वहीं पालनपुर के विशाल प्रांगण में बीजेपी के प्रथम अध्यक्ष श्रीमान अटल बिहारी वाजपेयी जी की अध्यक्षता में आयोजित सभा में अशोक सिंहल जी ने हुँकार भरी थी-
“देश धर्म के काम न आयी  , वो बेकार जवानी है।
जिस हिन्दू का खून न खौला खून नहीं वह पानी है॥”
इस सभा के तीन दिन पश्चात अहमदाबाद,पंचमहाल,डीसा, महेसाणा,पालनपुर सिद्धपुर आदि लगभग दर्जनों स्थानों पर अक्षय तृतीया अर्थात गुजरात के प्रसिद्ध पर्व-“अखातरी” पर एकसाथ एकही समय शांतिदूतों ने हमारे प्रसिद्ध मन्दिरों पर आक्रमण किया ! सैकडों लोगों को गंभीर चोटें आयीं ! दर्जनों लोग मारे गये ! किसी शांतिदूत ने अपनी छत के ऊपर से मुझपर ईंट फेंक कर मारी थी ! उस समय मैंने पगडी बांध रखी थी फिर भी मेरे सर पर सात टांके आये थे ! और फिर पुलिस-प्रशासन ने ताण्डव किया था ! घायलों को पीटते हुवे वो थाने ले जाती ! उनपर -“ऊपर से कडाई पूर्वक आदेश थे” किसी का कोई इलाज नहीं इसकी बात छोड़िये सैकडों लोगों पर जो केवल अलग-अलग नगरों में मन्दिर में दर्शन करने आये थे ! उनपर दर्जनों धारायें लगा दी गयीं ! वो तो फिर भी मैं तद्कालीन पुलिस प्रशासन को धन्यवाद दूँगा कि उन्होंने पंचमहाल की तरह उन निर्दोष लोगों का-“एन काउंटर” नहीं किया।
मित्रों क्या खाकर आज वही कांग्रेस के लोग ! अर्थात उनके पारिवारिक सदस्य बीजेपी में आकर रामभक्तों की ! कारसेवकों की कतार में आगे बैठ गये ! और जिन्होंने गोलियां खायीं ! लाठियों से पीटे गये ! जिनको थानों में नंगा कर के बैलों की तरह पीटा गया ! जो दसियों साल तक अदालत की दहलीज पर भटकते रहे ! गोलियां चलवाने वाले लोग आज रामभक्त हो गये ? हाँ ये बिलकुल सही है कि-“उबरै अंत न होंहि निबाहूं- कालनेमि जिमि रावन राहू।”
मित्रों ! श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ में सर्वाधिक दण्ड उत्तर प्रदेश एवं गुजरात के लोगों को मिला ! यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि तद्कालीन गुजरात की आर्थिक स्थिति अत्यंत ही दयनीय थी ! महेसाणा,पाटन और बनासकांठा जिले भुखमरी के शिकार थे ! भारत के कम ही लोग ये जानते होंगे कि तद्कालीन ये जिले और यहाँ से लगे राजस्थान के कुछ जिलों में 40% कुवों से-“खारा पानी” आता था जो न पीने योग्य था और न ही कृषि के ! परिणामस्वरूप लो दयनीय स्थिति में जी रहे थे ! कुछेक श्रीमंतों ने अधिक गहराई तक-“सायडा” करके सबमर्सीबल बैठायीं थीं जिससे उनके खेत हरे भरे रहते थे ! उनमें चौधरी और पटेल लोगों का वर्चस्व था ! दूसरी ओर वहाँ की आदिवासी ठाकरडा जनजाति दयनीय स्थिति में थी ! और इसी परिस्थिति का लाभ उठाकर कांग्रेस वहाँ-“एचएमटी” का कार्ड खेलती थी।
एच अर्थात हरिजन,एम अर्थात मुस्लिम और टी अर्थात ठाकरडा ! यही वह महत्वपूर्ण कारण था कि वहाँ कांग्रेस ने एक प्रकार से गृहयुद्ध की स्थिति उत्पन्न कर दी थी।
आज जैसी स्थिति पश्चिम बंगाल की है उससे दसगुनी खराब स्थिति मुलायम सिंह यादव ने उत्तर प्रदेश में,लालू यादव ने बिहार में और उपरोक्त दो लोगों ने गुजरात में बना रखी थी ! मुझे स्मरण है कि बिना किसी एफआइआर के मेरे पीछे पुलिस-प्रशासन को सादे कपडों में लगाया गया था ! उस समय कार कम थीं कुछ लोगों के पास महेन्द्रा की जीप हुवा करती थी ! अक्सर कार्यक्रमों में मैं किसी की बाइक में जाना सुरक्षित समझता था ! किन्तु दुर्भाग्य से एक रात महेसाणा के पास बासणा से पहले किसी मुस्लिम गांव के पास बाइक को रोकने के लिये सडक की दोनों ओर के पेडों से लोहे के तार बांधे गये थे ! जिससे टकराकर बाइक गिर पडी और मुझे ले जा रहे कार्यकर्ता अउचड भाई तडसी भाई तथा हम गिर पडे ! और पास खेतों में पूरी रात छुप कर बितायी और पचिसों मुस्लिम हम दोनों को ढूंढ रहे थे ! उन लोगों ने बाइक को भी जला दिया-क्रमशः ..आनंद शास्त्री सिलचर, सचल दूरभाष यंत्र सम्पर्कांक 6901375971″

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